नई दिल्ली/पेरिस: अमेरिका के रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत पर लगातार बढ़ते दबाव के बीच पोलैंड ने खुलकर भारत का समर्थन किया है। पोलैंड के विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की ने कहा है कि वे इस बात से संतुष्ट हैं कि भारत ने रूसी तेल आयात में कटौती शुरू कर दी है, क्योंकि इससे रूस की “युद्ध मशीन को फ्यूल” मिलने में कमी आएगी।
अमेरिका ने अपने नए सैन्शनिंग रूस एक्ट के तहत निकाले गए कानून को मंजूरी दे दी है, जिससे अब ऐसे देशों पर 500 प्रतिशत तक के टैरिफ़ लगाए जा सकते हैं जो जानबूझकर रूस से तेल खरीदते हैं — और इसको भारत, चीन व ब्राज़ील जैसे देशों पर लागू करने की योजना है।
सिकोरस्की ने नई दिल्ली और यूरोपीय नेताओं के साथ वीमर ट्रायंगल बैठक के दौरान कहा कि वह इस बात से खुश हैं कि भारत ने रूसी तेल खरीद में कमी लाई है और यह कदम सकारात्मक संकेत देता है। उन्होंने आगे कहा कि इस मुद्दे पर वह “भारत की यात्रा के दौरान और बातचीत करेंगे।”
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बैठक में यूरोपीय साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया और कहा कि यूरोप और भारत वैश्विक राजनीति तथा आर्थिक स्थिरता दोनों में सहयोग बढ़ा सकते हैं। बातचीत में यूक्रेन युद्ध, इंडो-पैसिफिक रणनीति और भारत-ईयू संबंधों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
यह कूटनीतिक गतिविधियाँ ऐसे समय में हुई हैं जब भारत अपनी एनर्जी रणनीति में बदलाव कर रहा है — रूस से कच्चे तेल की हिस्सेदारी में गिरावट आ रही है जबकि अमेरिका से कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ा है। हालांकि रूस अब भी भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में से एक बना हुआ है।
प्रमुख बिंदु:
• पोलैंड ने भारत का समर्थन किया और रूसी तेल आयात में कटौती के लिए संतोष व्यक्त किया।
• अमेरिका के नए कानून के तहत 500% टैरिफ की धमकी से दबाव बढ़ा है।
• भारत-यूरोप की कूटनीतिक बातचीत में ऊर्जा और सुरक्षा मुद्दों पर जोर देखा गया।
• भारत अपनी ऊर्जा आयात रणनीति में बदलाव कर रहा है — रूस से आयात कम, अमेरिका से बढ़ा।
