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ईरान–इजरायल–संयुक्त राज्य अमेरिका संघर्ष तेज, संयुक्त अरब अमीरात में धमाके; बुर्ज खलीफा खाली

मिडिल-ईस्ट में हालात और गंभीर हो गए हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। शनिवार सुबह से ईरान के कई ठिकानों पर हमलों की खबरें हैं, जिसके बाद क्षेत्रीय तनाव चरम पर पहुंच गया है।

जवाबी कार्रवाई के तहत ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इस बीच संयुक्त अरब अमीरात में भी धमाकों की खबर सामने आई। दुबई में स्थित विश्व प्रसिद्ध इमारत बुर्ज खलीफा को एहतियातन खाली करा लिया गया।

रियाद में भी विस्फोटों की सूचना मिली है। अबू धाबी के दो निवासियों ने अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि उन्होंने अमेरिकी कर्मियों की मेजबानी वाले इलाकों के पास जोरदार धमाकों की आवाज सुनी। हमलों के बीच एक एशियाई नागरिक की मौत की भी पुष्टि हुई है।

यूएई के रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा, “आज यूएई पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों से स्पष्ट हमला किया गया। हमारी वायु रक्षा प्रणालियों ने कई मिसाइलों को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। एक आवासीय क्षेत्र में मिसाइल का मलबा गिरा, जिससे संपत्ति को नुकसान हुआ और एक एशियाई नागरिक की मृत्यु हुई।”

मंत्रालय ने बताया कि देश की सुरक्षा स्थिति नियंत्रण में है और सभी एजेंसियां चौबीसों घंटे हालात पर नजर रख रही हैं।

शनिवार को हालात तब और बिगड़े जब संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालय को भी निशाना बनाए जाने की खबर आई। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि हमले के समय वे वहां मौजूद थे या नहीं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है और अमेरिका के खिलाफ मिसाइलें विकसित कर रहा है। एक वीडियो संदेश में उन्होंने ईरानी जनता से मौजूदा शासन के खिलाफ खड़े होने की अपील की।

वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि संयुक्त अभियान का उद्देश्य ईरान द्वारा उत्पन्न “अस्तित्वगत खतरे” को समाप्त करना है। उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई ईरानी जनता को अपना भविष्य स्वयं तय करने का अवसर देगी।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि तेहरान इन हमलों का जवाब देने में कोई संकोच नहीं करेगा। बयान में कहा गया, “इतिहास गवाह है कि ईरानियों ने कभी विदेशी आक्रमण के आगे घुटने नहीं टेके। इस बार भी राष्ट्र की प्रतिक्रिया निर्णायक और स्पष्ट होगी।”

मौजूदा घटनाक्रम से पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी गहराती जा रही है।

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