नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान विपक्ष ने सरकार और संवैधानिक पदों को लेकर आक्रामक रुख अपना लिया है। विपक्षी दल लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने और मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने का नोटिस देने की तैयारी कर रहे हैं। इन दोनों मुद्दों को लेकर संसद में सियासी टकराव बढ़ने की संभावना है।
विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर Om Birla के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया है। जानकारी के अनुसार इस प्रस्ताव पर 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi को सदन में बोलने का अवसर नहीं दिया। कांग्रेस सांसद मंगलवार को सदन में यह प्रस्ताव पेश करने की तैयारी में हैं, हालांकि इसके लिए पहले सदन की अनुमति लेना आवश्यक होगा।
सूत्रों के मुताबिक इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान सरकार की ओर से Kiren Rijiju चर्चा की शुरुआत कर सकते हैं। इसके बाद Anurag Thakur, Nishikant Dubey, Ravi Shankar Prasad और Bhartruhari Mahtab सरकार का पक्ष रख सकते हैं। वहीं विपक्ष की ओर से Gaurav Gogoi, Manish Tewari, Deepender Singh Hooda और S. Jothimani स्पीकर के खिलाफ अपनी बात रख सकते हैं।
दूसरी ओर विपक्ष पहली बार मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar को हटाने के लिए नोटिस देने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के अनुसार इसका मसौदा तैयार हो चुका है और इसे इसी सप्ताह संसद में जमा किया जा सकता है। विपक्ष का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने पद की गरिमा को नुकसान पहुंचाया है।
बताया जा रहा है कि इस पहल में I.N.D.I.A. alliance के लगभग सभी दल शामिल हैं और नोटिस सामूहिक रूप से तैयार किया गया है। नियमों के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के प्रस्ताव के लिए लोकसभा के कम से कम 100 सांसदों या राज्यसभा के 50 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं।
कानून के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने जैसी ही होती है। यह तभी संभव है जब उनके खिलाफ साबित दुराचार या अक्षमता के आरोप सिद्ध हों। प्रस्ताव पास होने के लिए सदन के कुल सदस्यों का बहुमत और उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने भी कहा है कि यदि विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग लाता है तो उनकी पार्टी इसका समर्थन करेगी। वह फिलहाल राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान नाम काटे जाने के विरोध में धरना दे रही हैं।
संसद के मौजूदा बजट सत्र में इन दोनों मुद्दों को लेकर राजनीतिक माहौल काफी गरमाने के आसार हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष अपने प्रस्तावों को किस तरह आगे बढ़ाता है और सरकार की रणनीति क्या रहती है।
