देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सचिवालय में सिंचाई परियोजनाओं के तहत चल रहे रिवर प्रोटक्शन कार्यों और डीसिल्टिंग (गाद हटाने) की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आगामी मानसून सीजन में संभावित बाढ़ खतरे को देखते हुए सभी जरूरी कार्य समय से पूरे कर लिए जाएं।
बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि लघु सिंचाई विभाग द्वारा जल संरक्षण, संवर्द्धन और जल संभरण योजनाओं के अंतर्गत बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है। राज्य में अब तक 708 चेक डैम बनाए जा चुके हैं। इसके अलावा ऊधम सिंह नगर, नैनीताल और हरिद्वार जिलों में कुल 419 रिचार्ज शॉफ्ट स्थापित किए गए हैं, जिनसे प्रतिवर्ष लगभग 108.94 करोड़ लीटर भूजल रिचार्ज होने का अनुमान है।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि 9 वन प्रभागों में पेयजल विभाग और सारा (SARA) के माध्यम से 14 जल स्रोतों के उपचार के लिए जल संरक्षण कार्य किए जा रहे हैं। वहीं कैम्पा योजना के तहत विभिन्न वन प्रभागों में 247 जल धाराओं का उपचार किया जा रहा है, जिससे जल स्रोतों के पुनर्जीवन और संरक्षण में मदद मिलेगी।
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने वन विभाग को आगामी गर्मियों को देखते हुए वनाग्नि रोकथाम की पूरी तैयारी अभी से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आग की घटनाओं से निपटने के लिए मानव संसाधन के साथ आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता पहले से सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वन पंचायतों और वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों के साथ विभाग नियमित समन्वय बनाए रखे। वन संरक्षण में सराहनीय कार्य करने वालों को प्रोत्साहित करने की बात भी उन्होंने कही। साथ ही उन्होंने फायर लाइनों की समय पर सफाई और वन भूमि पर अतिक्रमण हटाने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
बैठक में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगोली, युगल किशोर पंत सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
यह समीक्षा बैठक स्पष्ट संकेत देती है कि राज्य सरकार इस बार मानसून और वनाग्नि—दोनों जोखिमों को लेकर पहले से सतर्क रणनीति पर काम कर रही है।

