बेंगलुरु। कर्नाटक की सियासत में मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे को लेकर चल रही अटकलों पर खुद नागेंद्र ने सफाई दी है। भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर विपक्षी बीजेपी और जेडीएस के निशाने पर चल रहे नागेंद्र ने बुधवार को इस्तीफे की पेशकश संबंधी खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया।
नागेंद्र के कार्यालय की ओर से जारी बयान में उनके हवाले से कहा गया कि मीडिया में इस्तीफे को लेकर चल रही खबरें पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय से उन्हें कोई फोन नहीं आया है और इस्तीफे को लेकर मुख्यमंत्री से कोई बातचीत भी नहीं हुई है।
मुख्यमंत्री से मुलाकात की खबरों के बीच बढ़ी हलचल
दरअसल, ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मुलाकात की है। यह भी चर्चा थी कि नागेंद्र पार्टी नेतृत्व को और असहज स्थिति में नहीं डालना चाहते और स्वेच्छा से इस्तीफा देने की पेशकश कर सकते हैं।
हालांकि, नागेंद्र ने इन सभी अटकलों को खारिज करते हुए मीडिया से सहयोग की अपील की है।
89 करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद
बी. नागेंद्र को कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित 89 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं को लेकर बीजेपी और उसकी सहयोगी जेडीएस के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। विपक्ष लगातार नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग कर रहा है।
इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने कर्नाटक विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान विधान सौध के अंदर और बाहर प्रदर्शन किया था। हंगामे के बीच विधानसभा सत्र को निर्धारित समय से तीन दिन पहले 24 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
सुसाइड नोट के बाद सामने आया था मामला
वाल्मीकि निगम से जुड़ा विवाद मई 2024 में निगम के लेखा अधिकारी चंद्रशेखरन पी. की आत्महत्या के बाद सामने आया था। उन्होंने कथित तौर पर एक नोट छोड़ा था, जिसमें बिना मंजूरी के धनराशि ट्रांसफर किए जाने के आरोप लगाए गए थे।
इसके बाद हुई जांच में निगम के बैंक खातों से कथित तौर पर अलग-अलग खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई। इस मामले ने कर्नाटक की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था।
2024 में दिया था इस्तीफा, 2026 में फिर बने मंत्री
विवाद के बीच नागेंद्र ने जून 2024 में सिद्धारमैया सरकार के मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 3 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व में मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान उन्हें दोबारा मंत्री बनाया गया।
अब एक बार फिर उनके इस्तीफे की खबरों ने कर्नाटक की राजनीति को गर्म कर दिया है। हालांकि, नागेंद्र की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि फिलहाल इस्तीफे को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय से कोई बातचीत नहीं हुई है।
बीजेपी की पदयात्रा से पहले सियासी हलचल
नागेंद्र के इस्तीफे की अटकलें ऐसे समय सामने आई हैं, जब कर्नाटक बीजेपी ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ 1 से 10 सितंबर तक रायचूर से बल्लारी तक 10 दिन की पदयात्रा निकालने का ऐलान किया है। ऐसे में नागेंद्र से जुड़ा विवाद आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है।
