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क्रेमलिन का बड़ा बयान: भारत किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र

मॉस्को, 5 फरवरी (स्टार समाचार): रूस के राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन ने स्पष्ट कहा है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है और इसमें कुछ भी नया नहीं है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बताया कि मॉस्को को भारत की ओर से रूसी तेल खरीद बंद करने के बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। पेस्कोव ने यह प्रतिक्रिया अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे के बाद दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत नई दिल्ली रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा।

पेस्कोव ने कहा कि भारत लंबे समय से विविध स्रोतों से कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदता रहा है और रूस उसका एकमात्र ऊर्जा आपूर्तिकर्ता कभी नहीं रहा। इसलिए मॉस्को को भारत की खरीद नीति में विविधता लाने की कोशिश में कोई नई बात नहीं दिखती। रूस का यह बयान यह संकेत देता है कि भारत की तेल खरीद नीति किसी भी तरह से रूस के खिलाफ नहीं, बल्कि यह एक सामान्य व्यावसायिक निर्णय है।

क्रेमलिन ने यह भी दोहराया कि भारत के साथ उसका ऊर्जा सहयोग स्थिर और पारस्परिक हित में है। पेस्कोव ने कहा, “हम और अन्य अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञ जानते हैं कि रूस भारत को तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करने वाला एकमात्र देश नहीं है।”

डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया भारत-अमेरिका व्यापार समझौता घोषित करते हुए दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस से तेल खरीदना बंद करने और अमेरिका तथा संभवतः वेनेज़ुएला से तेल खरीदने पर सहमति जताई है। लेकिन रूस ने इन दावों को खारिज किया है और कहा है कि नई दिल्ली से ऐसा कोई संकेत या आधिकारिक संदेश नहीं आया।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की ऊर्जा आयात नीति आर्थिक हितों और ऊर्जा सुरक्षा पर आधारित है, न कि किसी राजनीतिक दबाव पर। रूस हमेशा से यह मानता रहा है कि इसका भारत के साथ ऊर्जा सहयोग दोनों पक्षों के लिए लाभकारी है।

रूस का रुख स्पष्ट है — भारत अपनी तेल खरीद में स्वतंत्र है, मॉस्को को कोई आदेश या सूचना नहीं मिली है कि नई दिल्ली रूसी तेल खरीदना बंद करेगी, और दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग अभी भी कायम है।

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