देहरादून, 03 फरवरी 2026 — मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार का ‘जन-जन की सरकार, जन-जन द्वार’ कार्यक्रम अब गुड गवर्नेंस का एक सशक्त और भरोसेमंद मॉडल बनकर उभर रहा है। इस अभिनव पहल का उद्देश्य शासन को लोगों के द्वार तक पहुँचाना और समस्याओं का तुरंत, पारदर्शी एवं संवेदनशील समाधान सुनिश्चित करना है।
03 फरवरी 2026 तक उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों में इस पहल के अंतर्गत कुल 555 कैंप आयोजित किए जा चुके हैं।
➡️ 548 कैंप पूर्व में आयोजित हुए
➡️ 7 कैंप आज आयोजित हुए
इन कैंपों में अब तक कुल 4,36,391 नागरिकों ने भाग लिया है, जिनमें से 2,810 नागरिक आज शामिल हुए।
जनसुनवाई कैंपों के दौरान नागरिकों ने कुल 43,032 शिकायतें और प्रार्थना पत्र सौंपे, जिनमें से
✔️ 29,042 शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है — जिसमें आज 321 शिकायतों का समाधान किया गया है।
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि सरकार केवल सुनवाई नहीं कर रही, बल्कि समाधान भी सुनिश्चित कर रही है।
कैंपों के माध्यम से नागरिकों को कई सरकारी सेवाएं तत्काल रूप से उपलब्ध कराई गईं:
▪️ 61,460 से अधिक प्रमाण पत्र/सेवाएं प्रदान की गईं
▪️ 2,39,766 नागरिकों को विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित किया गया
यह दर्शाता है कि प्रशासन सिर्फ शिकायत सुनने तक सीमित नहीं, बल्कि नागरिकों की वास्तविक आवश्यकताओं का समाधान भी प्राथमिकता से कर रहा है।
मुख्यमंत्री धामी की गुड गवर्नेंस सोच का सबसे सशक्त प्रभाव महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में देखा गया है।
🔹 दुर्गम पहाड़ी इलाकों की महिलाओं को अब प्रमाण पत्र, पेंशन, राशन कार्ड, स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा सेवाएँ सीधे अपने गांव में ही उपलब्ध हो रही हैं।
🔹 इससे महिलाओं में प्रशासन के प्रति आस्था और सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है।
अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चम्पावत, नैनीताल, ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी — सभी जिलों में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान और सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।
‘जन-जन की सरकार, जन-जन द्वार’ कार्यक्रम यह सिद्ध करता है कि उत्तराखंड की सरकार जवाबदेह, पारदर्शी, संवेदनशील और लोगों के साथ खड़ी है। नीतियाँ केवल कागजों पर नहीं रुकतीं — वे जमीन पर उतरकर लाखों नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान कर रही हैं।
सीएम धामी के शब्दों में:
“हमारा संकल्प है कि शासन केवल सचिवालय तक सीमित न रहे, बल्कि अंतिम व्यक्ति के द्वार तक पहुँचे। इन कैंपों के माध्यम से लाखों नागरिकों की समस्याओं का समाधान हुआ है। विशेष रूप से दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं को प्रशासनिक सहायता सीधे स्थानीय स्तर पर मिल रही है। हमारी प्राथमिकता है संवेदनशील, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन के माध्यम से उत्तराखंड को सुशासन का आदर्श राज्य बनाना।”

