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अमेरिका वापस करेगा भारत को 3 प्राचीन कांस्य मूर्तियाँ — सांस्कृतिक विरासत की वापसी में बड़ा कदम

नई दिल्ली / वाशिंगटन: अमेरिका के नेशनल म्यूज़ियम ऑफ एशियन आर्ट (Smithsonian Institution) ने घोषणा की है कि वह भारत सरकार को तीन दुर्लभ प्राचीन कांस्य मूर्तियाँ वापस करेगा, जिनके संबंध तमिलनाडु के मंदिरों से हैं। यह निर्णय गहन जांच और विस्तृत provenance research के बाद लिया गया है, जिसमें यह साबित हुआ कि ये मूर्तियाँ 1950 के दशक में अवैध रूप से मंदिरों से हटाई गई थीं।

कौन-सी मूर्तियाँ वापस हो रही हैं?

🔹 शिव नटराज (चोल काल, लगभग 990 ई.): भगवान शिव के नृत्य रूप की यह प्रतिष्ठित मूर्ति थी।
🔹 सोमस्कंद (चोल काल, 12वीं शताब्दी): शिव, पार्वती और कार्तिकेय को एक साथ दर्शाती यह मूर्ति।
🔹 सेंट सुंदरर विद परवई (विजयनगर काल, 16वीं शताब्दी): संत सुंदरर और उनकी पत्नी परवई का चित्रण।

ये तीनों मूर्तियाँ दक्षिण भारतीय कांस्य कला की उत्कृष्ट कृतियाँ मानी जाती हैं और मूल रूप से मंदिरों में पूजा तथा शोभायात्राओं के लिए उपयोग होती थीं।

म्यूजियम की provenance research में फ्रेंच इंस्टिट्यूट ऑफ पॉन्डिचेरी के फोटो आर्काइव्स, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और अन्य स्रोतों से मिली पुरानी तस्वीरों का उपयोग किया गया। इन तस्वीरों में 1956-1959 के बीच मूर्तियाँ तमिलनाडु के मंदिरों में स्पष्ट रूप से दिखाई देती थीं। आगे की जांच में यह भी पता चला कि कुछ मामलों में फर्जी दस्तावेज़ों का उपयोग किया गया था।

मूर्तियों की वापसी की व्यवस्था

• शिव नटराज मूर्ति को भारत सरकार की सहमति से लॉन्ग-टर्म लोन के रूप में Smithsonian म्यूज़ियम में प्रदर्शित रखा जाएगा, ताकि इसका पूरा इतिहास — उत्पत्ति, चोरी और वापसी — सार्वजनिक रूप से साझा किया जा सके ।
• सोमस्कंद और संत सुंदरर विद परवई मूर्तियाँ भारतीय दूतावास के माध्यम से भारत भेजी जाएँगी।
म्यूजियम और भारतीय दूतावास वर्तमान में इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए निकट संपर्क में हैं।

यह फैसला सांस्कृतिक संपदा की नैतिक जिम्मेदारी और वैश्विक स्तर पर लूटे गए इतिहासिक अवशेषों की वापसी के प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे रिटर्न से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पुनर्स्थापित करने में मदद मिलेगी और यह वैश्विक सांस्कृतिक न्याय की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

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