वॉशिंगटन। ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख और आक्रामक होता जा रहा है। ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड पर कब्जे की मंशा जाहिर करते हुए इस पूरे विवाद में रूस का नाम लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि डेनमार्क ग्रीनलैंड से जुड़े रूसी खतरे को रोकने में पूरी तरह नाकाम रहा है और अब “समय आ गया है” कि इस मुद्दे पर कार्रवाई की जाए।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया वेबसाइट ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा, “NATO पिछले 20 वर्षों से डेनमार्क से कह रहा है कि उसे ग्रीनलैंड से रूसी खतरे को दूर करना होगा, लेकिन दुर्भाग्य से डेनमार्क इस दिशा में कुछ भी नहीं कर पाया है। अब समय आ गया है, और यह किया जाएगा।” ट्रंप लगातार यह दोहराते रहे हैं कि वे डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड के मालिकाना हक से कम पर किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं हैं।
हालांकि, डेनमार्क और ग्रीनलैंड—दोनों के नेताओं ने साफ शब्दों में कहा है कि यह द्वीप बिक्री के लिए नहीं है और न ही वह अमेरिका का हिस्सा बनना चाहता है। इसके बावजूद ट्रंप ने चेतावनी दी है कि जब तक अमेरिका को ग्रीनलैंड खरीदने की अनुमति नहीं दी जाती, तब तक यूरोपीय सहयोगी देशों पर बढ़ते टैरिफ लागू किए जाएंगे। ट्रंप का तर्क है कि चीन और रूस की बढ़ती मौजूदगी के चलते ग्रीनलैंड अमेरिकी सुरक्षा हितों के लिए बेहद अहम हो गया है।
दूसरी ओर, डेनिश और अन्य यूरोपीय अधिकारियों का कहना है कि ग्रीनलैंड पहले से ही NATO के सामूहिक सुरक्षा समझौते के दायरे में आता है, इसलिए वहां अलग से किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं है।
ग्रीनलैंड को लेकर मचे इस बवाल के बीच वहां हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय झंडे लहराए और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ नारेबाजी की। लोगों ने साफ संदेश दिया कि “ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है।” ट्रंप लंबे समय से इस द्वीप को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और खनिज संसाधनों से भरपूर बताते रहे हैं और इसे अमेरिका के लिए जरूरी मानते हैं।
ग्रीनलैंड की पूर्व संसद सदस्य टिली मार्टिनुसेन ने ट्रंप के बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ट्रंप प्रशासन इस “पागलपन भरे विचार” को छोड़ देगा। टिली ने कहा, “उन्होंने खुद को हमारे दोस्त और सहयोगी के रूप में पेश किया था, लेकिन अब सीधे तौर पर धमकी दे रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि NATO और ग्रीनलैंड की आज़ादी की रक्षा करना किसी भी तरह के टैरिफ दबाव से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है।
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के लगातार बयानों से अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच तनाव बढ़ता नजर आ रहा है और यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़े विवाद के रूप में उभरता जा रहा है।
