onwin giriş
Home अंतर-राष्ट्रीय

ट्रंप का ग्रीनलैंड विवाद और आर्कटिक में रणनीतिक तनाव

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर स्पष्ट किया है कि वे ग्रीनलैंड को हासिल करना चाहते हैं ताकि वह रूस या चीन के प्रभाव से पहले यह रणनीतिक क्षेत्र अमेरिका के नियंत्रण में रहे। ट्रंप का कहना है कि अगर ग्रीनलैंड को अमेरिका “शांति से नहीं ले सकता” तो “कठिन रास्ता” अपनाना पड़ेगा, और इस पर विचार चल रहा है। इस बयान के बाद डेनमार्क और यूरोपीय देशों में कड़ी प्रतिक्रिया हुई है।

🔹 ट्रंप ने कहा है कि ग्रीनलैंड को अगर अमेरिका नहीं लेता तो रूस या चीन यह क्षेत्र हासिल कर लेंगे। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला बताया है और कहा कि ग्रीनलैंड का नियंत्रण अमेरिका के लिए “एक आवश्यक रणनीतिक कदम” है।

🔹 ग्रीनलैंड क्या है?

  • ग्रीनलैंड बर्फ से ढंका विशाल द्वीप है, लेकिन यह डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है और NATO का हिस्सा भी माना जाता है।
  • यहाँ अमेरिका का एक सैन्य बेस है, और यह आर्कटिक क्षेत्र में आर्थिक और सैन्य दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेत्ते फ्रेडरिक्सेन ने कहा है कि ग्रीनलैंड “बेचा नहीं जाएगा” और अगर अमेरिका इसका बलपूर्वक कब्जा करेगा तो इसका मतलब NATO का अंत हो सकता है।

ग्रीनलैंड के नेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है, “हम अमेरिकी नहीं बनना चाहते, न डेनिश, हम ग्रीनलैंडर्स हैं।” और उन्होंने देश के भविष्य को खुद तय करने का अधिकार होने पर जोर दिया है।

रूस और चीन के आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ते प्रभाव के मद्देनजर ब्रिटेन सहित कई NATO देशों ने बातचीत शुरू की है ताकि इस क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूत किया जा सके। हालांकि ब्रिटेन की परिवहन सचिव ने कहा है कि यह बातचीत ट्रंप के बयानों का केवल सामान्य रणनीतिक हिस्स है, न कि अमेरिका के विचारों की प्रतिक्रिया के रूप में शुरू हुई है।

बेल्जियम के रक्षा मंत्री ने सुझाव दिया है कि NATO को आर्कटिक में सुरक्षा बढ़ाने के लिए संयुक्त रक्षा मिशन बनाना चाहिए, जिससे रूस और चीन को रोकने का प्रयास हो सके।

ट्रंप ने ग्रीनलैंड को हासिल करने की रूचि 2019 में भी जताई थी, लेकिन डेनमार्क ने उस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था।

इस बार उन्होंने सैन्य विकल्प भी पूरी तरह से खारिज नहीं किया है और कहा कि चाहे स्थिति “आसान” हो या “कठिन”, अमेरिका कुछ न कुछ करेगा।

अमेरिका और डेनमार्क के बीच यह विवाद NATO, आर्कटिक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून जैसे बड़े मुद्दों पर बहस का कारण बन गया है।

कई NATO सहयोगी इस विचार से चिंतित हैं कि अगर अमेरिका ग्रीनलैंड पर बल से नियंत्रण करने की कोशिश करता है तो यह सैन्य गठबंधन के बुनियादी सिद्धांतों को भी चुनौती दे सकता है।

यह स्पष्ट नहीं है कि अगर अमेरिका वास्तव में ग्रीनलैंड पर नियंत्रण करना चाहे तो NATO के अन्य सदस्य इसका समर्थन करेंगे या डेनमार्क की रक्षा में आगे आएंगे। लेकिन एक बात निश्चित है कि यह विवाद आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा, भू-राजनीति और वैश्विक शक्ति संतुलन के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।

Similar Posts

© 2015 News Way· All Rights Reserved.