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अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड ने नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) को आडिट आपत्तियों का जवाब नहीं भेजा

उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड ने श्रम सचिव के निर्देश के बावजूद अभी तक नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) को आडिट आपत्तियों का जवाब नहीं भेजा है। मुख्य सचिव एसएस संधु ने इस पर सख्त नाराजगी जताते हुए अविलंब ब्योरा उपलब्ध कराने को कहा है। मुख्य सचिव के निर्देश के क्रम में अब शासन द्वारा बोर्ड को रिमाइंडर भेजा जा रहा है।

कर्मकार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल और श्रम मंत्री डा हरक सिंह रावत के बीच छिड़ी रार के बीच कैग ने पिछले वर्ष बोर्ड के कार्यों का आडिट किया था। इस वर्ष मार्च में कैग ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपी थी। साथ ही आडिट आपत्तियों के संबंध में बोर्ड से जवाब मांगा था। इस बीच सरकार में हुए नेतृत्व परिवर्तन के बाद बोर्ड की सचिव को बदल दिया गया। फिर बोर्ड के अध्यक्ष और सचिव के मध्य विवाद कारण बोर्ड का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस बीच कैग को आडिट आपत्तियों का जवाब न मिलने पर करीब एक माह पहले सचिव श्रम ने बोर्ड को पत्र भेजकर कैग को ब्योरा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बावजूद इसके अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

सूत्रों के अनुसार बुधवार को मुख्य सचिव एसएस संधु ने सचिव श्रम से पूरे मामले की जानकारी ली। उन्होंने बोर्ड के रवैये पर सख्त नाराजगी जताई और निर्देश दिए कि कैग को उपलब्ध कराने के लिए अविलंब जवाब मांगा जाए। उधर, संपर्क करने पर सचिव श्रम हरबंस सिंह चुघ ने बताया कि मुख्य सचिव के निर्देशों के क्रम में बोर्ड को रिमाइंडर भेजकर कैग को तत्काल जवाब देने के लिए निर्देशित किया जा रहा है।कर्मकार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल ने श्रम मंत्री डा हरक सिंह रावत के उस वक्तव्य पर तंज कसा है, जिसमें रावत ने कहा था कि सत्याल उन्हें श्रम मंत्री ही नहीं मानते। सत्याल ने कहा, ‘श्रम मंत्री तो हरक सिंह रावत ही हैं, मैं तो छोटे से बोर्ड का संतरी हूं।’ उन्होंने कहा कि जहां तक श्रम मंत्री से मुलाकात का सवाल है तो वह पूर्व में हरक सिंह रावत से शिष्टाचार मुलाकात कर चुके हैं। सत्याल ने कहा कि यदि श्रम मंत्री उन्हें बुलाते हैं तो वह मिलने चले जाएंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बोर्ड के कार्यों को लेकर कैग की आडिट रिपोर्ट के साथ ही अन्य जो भी जांच हुई हैं, उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

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