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टोक्यो ओलिंपिक में वंदना कटारिया ने शानदार प्रदर्शन कर देश और प्रदेश का मान बढ़ाया; मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार दोपहर वंदना कटारिया के रोशनाबाद स्थित आवास पर पहुंचकर टोक्यो ओलिंपिक में शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी। पुष्पगुच्छ देकर और शाल ओढ़ाकर वंदना को सम्मानित किया। साथ ही सम्मान स्वरूप 25 लाख रुपये का चेक सौंपा। इसके अलावा वंदना को मिले तीलू रौतेली पुरस्कार के तहत 31 हजार रुपये का चेक, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न भी भेंट किया।मुख्यमंत्री ने कहा कि टोक्यो ओलिंपिक में वंदना कटारिया ने शानदार प्रदर्शन कर देश और प्रदेश का मान बढ़ाया है। साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेले मुकाबले में लगातार तीन गोल कर हैट्रिक लगाने वाली वंदना ने ओलिंपिक महिला हाकी में इतिहास रच दिया है। देश दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान बनायी है। उन्होंने वंदना को आगे भी इसी मनोबल से खेलने के लिए प्रेरित किया। उम्मीद जतायी कि राष्ट्रमंडल, एशियाई खेल और हाकी विश्व कप में वह और भी बेहतर प्रदर्शन करेंगी। कहा कि वंदना को महिला सशक्तिकरण के तहत बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का ब्रांड एंबेसडर भी बनाया है। दूरस्थ क्षेत्रों में अभाव में रहने वाली लड़कियों के लिए वंदना प्रेरणास्रोत बनेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि खिलाड़‍ियों को अधिक से अधिक सुविधाएं मिल सकें, इसके लिए राज्य में नई खेल नीति भी बनाई जा रही है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डा. धन सिंह रावत, स्वामी यतीश्वरानंद, रानीपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक आदेश चौहान, झबरेड़ा विधायक देशराज कर्णवाल, भाजपा के जिला उपाध्यक्ष अमन त्यागी, एडीएम वित्त एवं राजस्व केके मिश्रा, एसडीएम अंशुल सिंह, जिला क्रीड़ा अधिकारी सुनील डोभाल, सचिव एचसी सेमवाल के अलावा वंदना की मां सोरण देवी और स्वजन मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री के हाथों सम्मान पाकर वंदना अभिभूत दिखीं। मीडिया से बातचीत में वंदना ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उन्हें जो मान सम्मान दिया है उसके लिए वह दिल से धन्यवाद करती हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि एक बार उनकी मकान को लेकर बात हुई थी। लेकिन, दोबारा इस पर कोई बात नहीं की है।मुख्यमंत्री के आगमन से पूर्व रोशनाबाद स्पोट्र्स स्टेडियम के पास क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत करायी गयी। गड्ढे आदि को भरा गया। साफ-सफाई कराने के साथ ही कीटनाशक का छिड़काव कराया गया। हालांकि कई खाली पड़े प्लाटों में जमा गंदगी को छिपाने के लिए टेंट और बैरिकेटिं का भी सहारा लिया गया।

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