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उत्तराखंड में अब जरूरतमंदों को मिल सकेगी सरकारी भूमि

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उत्तराखंड में उपलब्ध खाली सरकारी भूमि अब जरूरतमंदों को मिल सकेगी। इसके लिए उत्तराखंड राजस्व विभाग ने नई नीति तैयार की है। इसके तहत टेंडर जारी होंगे और न्यूनतम बोली सर्किल रेट के आधार पर तय की जाएगी।
उत्तराखंड में पिछले 19 साल से चल रहे सरकारी भूमि की बंदरबांट पर सरकार ने अंकुश लगाने की तैयारी कर ली है। इसके तहत जरूरतमंद लोगों को समान रूप से सरकारी जमीन लेने का मौका भी मिलेगा। सरकारी जमीन का जिले स्तर पर लैंडबैंक बनेगा और भूमि आवंटन के लिए टेंडर निकाला जाएगा।

प्रदेश सरकार इस समय निजी क्षेत्र में लोगों को गवर्मेंट ग्रांट एक्ट सहित अन्य कई तरीकों से पट्टे आदि पर भूमि उपलब्ध कराती है। सरकार के इन फैसलों पर अकसर सवाल भी उठते रहे हैं। जिस पर जनता उंगली उठाती आ रही है |

उत्तराखंड शासन का मानना है कि इस नई नीति से लोगाें को सरकारी भूमि पाने का समान अवसर मिलेगा। नीति में स्पष्ट रूप से इसकी व्यवस्था की जा रही है। इससे सरकार को दोहरा फायदा होगा। पहला यह कि जिले स्तर पर यह स्पष्ट हो पाएगा कि कहां कितनी सरकारी भूमि उपलब्ध है। दूसरा यह कि सरकार के राजस्व में भी इजाफा होगा।

प्राथमिकता भी तय होगी
लोगों को जमीन देने की प्राथमिकता तय होगी। इसमें भूमि के उपयोग का प्रावधान, मसलन उद्योग, जैविक खेती आदि भी देखा जाएगा। राज्य सरकार अपनी प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को वरीयता देगी। यह भी देखा जाएगा कि परियोजना कितने समय में पूरी होगी। इससे कितने लोगों को रोजगार मिलेगा। अधिक लोगों को रोजगार देने वाली परियोजनाओं को आगे रखा जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि सरकार को इससे राजस्व का कितना फायदा होगा।

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