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पूर्व मुख्यमंत्रियों के मामले में उत्तराखंड सरकार को हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

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पूर्व मुख्यमंत्रियों को राहत देने को लागू एक्ट को हाईकोर्ट के असंवैधानिक करार देने से सरकार को झटका लगा है। हाईकोर्ट के आदेश ने कांग्रेस को भी एक बार फिर सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया। प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि पार्टी इस आदेश का स्वागत करती है। सरकार से मांग करती है कि हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्रियों से बकाया राशि की तत्काल रिकवरी की जाए।

पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगलेनुमा आवासों के लिए अब बाजार भाव से किराया देना होगा। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से ही ये ट्रेंड चल निकला था। नतीजतन पूर्व मुख्यमंत्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं को लेकर सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ता चला गया। ‘दैनिक जागरण’ ने ‘कोठी छूटे ना’ अभियान के तहत लंबे समय तक इस मुद्दे को उठाया था।

उधर, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि हाईकोर्ट के सख्त रुख के बावजूद प्रदेश सरकार पूर्व मुख्यमंत्रियों को राहत देने की लगातार कोशिश कर रही थी। रिकवरी करने के बजाए एक्ट बनाकर आवासीय किराए की माफी का रास्ता बनाया गया। सरकार के इस कदम को हाईकोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया है। सरकार का यह रुख चिंता का विषय है। पूर्व मुख्यमंत्रियों से वसूली में ना-नुकुर नहीं होनी चाहिए।

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Publish Date:Tue, 09 Jun 2020 09:47 PM (IST)
पूर्व मुख्यमंत्रियों के मामले में सरकार को हाईकोर्ट से झटका, कांग्रेस ने बोला हमला
पूर्व मुख्यमंत्रियों को राहत देने को लागू एक्ट को हाईकोर्ट के असंवैधानिक करार देने से सरकार को झटका लगा है। कांग्रेस को एक बार फिर सरकार पर हमला करने का मौका दिया।
देहरादून, राज्य ब्यूरो। पूर्व मुख्यमंत्रियों को राहत देने को लागू एक्ट को हाईकोर्ट के असंवैधानिक करार देने से सरकार को झटका लगा है। हाईकोर्ट के आदेश ने कांग्रेस को भी एक बार फिर सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया। प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि पार्टी इस आदेश का स्वागत करती है। सरकार से मांग करती है कि हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्रियों से बकाया राशि की तत्काल रिकवरी की जाए।

पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगलेनुमा आवासों के लिए अब बाजार भाव से किराया देना होगा। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से ही ये ट्रेंड चल निकला था। नतीजतन पूर्व मुख्यमंत्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं को लेकर सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ता चला गया। ‘दैनिक जागरण’ ने ‘कोठी छूटे ना’ अभियान के तहत लंबे समय तक इस मुद्दे को उठाया था।

उधर, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि हाईकोर्ट के सख्त रुख के बावजूद प्रदेश सरकार पूर्व मुख्यमंत्रियों को राहत देने की लगातार कोशिश कर रही थी। रिकवरी करने के बजाए एक्ट बनाकर आवासीय किराए की माफी का रास्ता बनाया गया। सरकार के इस कदम को हाईकोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया है। सरकार का यह रुख चिंता का विषय है। पूर्व मुख्यमंत्रियों से वसूली में ना-नुकुर नहीं होनी चाहिए।

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उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की की हाईकोर्ट के आदेश का तुरंत पालन किया जाए। पूर्व मुख्यमंत्रियों से बाजार दर पर आवासीय किराया वसूल किया जाना चाहिए। साथ ही हाईकोर्ट के आदेश पर इसतरह अमल किया जाए कि यह भविष्य में सिर्फ उत्तराखंड नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए नजीर बने। सरकार के ढुलमुल रवैये से राज्य की छवि को भी नुकसान पहुंचा है।

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अवधेश कौशल (पद्मश्री एवं रूलक संस्था के संस्थापक) का कहना है कि हाईकोर्ट पूर्व मुख्यमंत्रियों से वसूली को लेकर जो भी आदेश देता रहा है, सरकार ने उसका पालन करने से बचती रही है। पूर्व मुख्यमंत्रियों को दिए गए आवास के किराए की बाजार भाव से वसूली के लिए लाए गए अधिनियम को अब खारिज कर दिया गया है। हाईकोर्ट के आदेश को अब सरकार को मानना पड़ेगा। इससे राजनीति में शुचिता और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा। राज्य की मेहनतकश जनता की गाढ़ी कमाई को सियासतदां पर लुटाया नहीं जा सकता। इस संबंध में लंबी लड़ाई मुकाम तक पहुंची है। इस बीच तमाम तरह से बाधाएं डालने के प्रयास भी हुए, लेकिन राज्य की जनता को न्याय मिल गया

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