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किंग कोबरा पर रिसर्च कर रह उत्तराखंड वन विभाग, जानिए क्या है ख़ास…

उत्तराखंड वन विभाग वैसे तो लगातार वन्यजीवों के मानव संघर्ष की हो रही घटनाओं के चलते लगातार रिसर्च करता रहा है. वन्यजीवों की जीवन में हो रहे बदलाव के कारण लगातार अब उनकी लुप्त होती प्रजातियों को बचाने के लिए वन विभाग की ओर से रिसर्च किए जा रहे हैं. वन विभाग यह मान रहा है कि लगातार लोगों की वन्य जंगलों में बढ़ती आवाजाही के कारण वन्यजीवों का जीवन प्रभावित हो रहा है. जिसके चलते सदियों से वन्यजीवों की स्थिति में बदलाव आता जा रहा है.

उत्तराखंड वन विभाग की ओर से अलग-अलग रिसर्च किए जा रहे हैं. सबसे पहले अगर बात करें तो उत्तराखंड की झिलमिल झील से सदियों से बारहसिंघा का पलायन मेरठ हस्तिनापुर में होता आया है. जिसके चलते झिलमिल झील से हस्तिनापुर तक के रास्ते में के बीच में बारहसिंघा और उसकी प्रजाति सदियों से मूवमेंट करता रहा है. अब लोगों की आवाजाही और खेती बाड़ी का कार्य होने के कारणों का रास्ता क्लियर नहीं हो पाता है. वन विभाग उत्तराखंड उत्तर प्रदेश सरकार से बात कर रहा है और जो सदियों से लगातार बारहसिंगा की प्रजाति मूवमेंट करती आई है.
दूसरा रिसर्च किंग कोबरा का है, जो उत्तराखंड के जंगल में पाया जाता है. सिर्फ यही एक सांप है जो भोजन के लिए सांप को ही खा जाता है. वन विभाग मान रहा है किंग कोबरा लोगों के लिए खतरा है. साथ ही पूर्व समय में किंग कोबरा किस तरीका व्यवहार रहता था और अब किस समय किंग कोबरा की स्थिति उत्तराखंड के जंगलों में क्या है. वन विभाग इसे लेकर लगातार रिसर्च कर रहा है ताकि लुप्त प्रजाति में कोई तब्दीली ना हो और वन्यजीवों के प्रति जो लोग लापरवाही बरतते हैं वह सभी स्थिति को समझें.

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