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आर्थिक तंगी से जूझ रहा उत्तराखंड वन निगम अब अपने डिवीजनो को आधा करेगा

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अपनी आर्थिक तंगी से जूझ रहा वन निगम अब अपने प्रभाग (डिवीजन) आधे करने की तैयारी में है। 21 सितंबर को होने वाली गवर्निंग बॉडी की बैठक में इसका प्रस्ताव लाया जाएगा। इससे कार्मिकों की संख्या और संसाधनों की जरूरत घटेगी।

लॉगिंग-बिक्री मिलाकर वन निगम के 26 प्रभाग हैं। इनमें से कहीं काम कम है तो कहीं काम का दबाव। कर्मचारियों का बंटवारा करीब-करीब एक जैसा ही है। सभी प्रभागों में औसतन तीन गाड़ियां, एक दफ्तर, दो चौकीदार एवं चार से पांच चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात हैं।

प्रभागों के मर्जर से सभी जरूरतें कम हो जाएंगी। इसके अलावा कई सारे खर्च भी घटेंगे। एक अफसर का कहना है कि राजनैतिक दखल के चलते एक से दूसरे डिवीजन में तबादले नहीं हो पाते हैं। मगर, मर्जर से इसका भी समाधान हो जाएगा।

करीब हजार पद खाली
वन निगम में ढांचे के अनुसार, करीब एक हजार पद खाली हैं और स्वीकृत 2,900 पदों की अपेक्षा करीब 1900 पद भरे हुए हैं। यानी एक हजार और कर्मचारियों की जरूरत है। डिवीजन आधे होते हैं तो यह जरूरत काफी कम हो जाएगी। इसके अलावा करीब 12 कर्मचारी आउटसोर्स के जरिये भी काम कर रहे हैं।

कई डिवीजनों में काम बेहद कम है और कई में ज्यादा। ऐसे में इन्हें मिलाकर एक किया जाएगा। कई नदियों में तो दो-दो प्रभाग बने हैं। उन्हें मिलाकर खनन प्रभाग बनाया जाएगा। इस तरह कर्मचारियों की भी ज्यादा जरूरत नहीं पड़ेगी। संसाधनों का सीमित इस्तेमाल होगा। तबादलों में भी आसानी होगी। जीबी की बैठक में यह प्रस्ताव लाया जा रहा है।

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