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उत्तराखंड केंद्रीय मंत्रालयों के दर पर जाकर ढांचागत विकास के जुगाड़ में ताकत झोंक रहा; जाने पूरी खबर

उत्तराखंड एक ओर केंद्रीय मंत्रालयों के दर पर जाकर ढांचागत विकास के लिए पाई-पाई के जुगाड़ में ताकत झोंक रहा है, दूसरी ओर केंद्रपोषित योजनाओं के लिए मिलने वाली बड़ी वित्तीय मदद इस्तेमाल को तरसना सवाल खड़े कर रहा है। गांवों व बस्तियों में पानी को सूखते हलक, कुपोषण से हांफता बचपन और अदद छत को तरसते गरीब विभागों की कारस्तानी बयां कर रहे हैं। जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, राष्ट्रीय पोषण मिशन और पारिवारिक लाभ जैसी करीब एक दर्जन केंद्रीय योजनाओं का 853 करोड़ खर्च नहीं हो पाया। इन योजनाओं से जुड़े सभी विभागों से कम खर्च को लेकर नियोजन विभाग ने स्पष्टीकरण मांगा है।विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले हिमालयी राज्य उत्तराखंड में जिन केंद्रपोषित ध्वजवाहक योजनाओं पर आम जनजीवन में खुशहाली लाने का दारोमदार है, उनका पूरी क्षमता के साथ उपयोग नहीं होना बेहद चिंताजनक है। दरअसल राज्य के पास खुद के आमदनी के ऐसे स्रोत नहीं हैं, जिनसे दूरस्थ पर्वतीय व ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण व विकास कार्यों में ज्यादा लागत आ रही है। राज्य के पास खुद के आमदनी के स्रोत ऐसे नहीं हैं कि उनके बूते विकास कार्यों की जन आकांक्षाओं को पूरा किया जा सके।

राज्य इन्हीं कारणों से अवस्थापना विकास को केंद्रपोषित खासतौर पर केंद्र की ध्वजवाहक योजनाओं पर निर्भर है। इनमें राज्य को मिलने वाला केंद्रीय अनुदान 90 फीसद तक है और राज्य को महज 10 फीसद ही अपनी ओर से लगाना पड़ रहा है। सरकार के ही विभाग इस हकीकत को मुंह चिढ़ा रहे हैं। बीते वित्तीय वर्ष 2020-21 में एक दर्जन अहम केंद्रपोषित योजनाएं 90 फीसद धनराशि खर्च नहीं कर पाईं हैं। पेयजल विभाग के तहत जल जीवन मिशन की हालत देखिए, 440.52 करोड़ में से सिर्फ 250.99 करोड़ खर्च किए गए। 43 फीसद राशि बगैर उपयोग रह गई।स्वच्छ भारत मिशन में राज्य के पल्ले में 178.05 करोड़ रहे, खर्च महज 146.12 करोड़ ही किए जा सके। 18 फीसद राशि खर्च को तरस गई। ऊर्जा विभाग की जिस दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना पर गांवों और गरीबों के जीवन में रोशनी बिखेरने की जिम्मेदारी है, उसमें 178.63 करोड़ में से 118.49 करोड़ खर्च हुए। 37 फीसद से ज्यादा धन का उपयोग नहीं करने के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है। सौभाग्य योजना में अति निर्धन परिवारों को बिजली कनेक्शन देने के लिए 1.50 करोड़ से ज्यादा राशि इस्तेमाल नहीं की गई।

                                           सर्वाधिक बुरी स्थिति महिला सशक्तीकरण व बाल विकास विभाग की है। चार महत्वपूर्ण योजनाओं की बड़ी राशि अप्रयुक्त रही। बेटी कुपोषण से मुक्ति के लिए राष्ट्रीय पोषण मिशन में 81.41 करोड़ में से 25.94 करोड़ यानी 32 फीसद से कम खर्च होना विभाग की लापरवाही बेपर्दा कर रहा है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, प्रधानमंत्री मातृवंदन योजना, महिला सशक्तीकरण मिशन में क्रमश: 81.06 फीसद, 70.15 फीसद और 65.64 फीसद खर्च किया गया। शेष राशि खजाने में कैद होकर रह गई।कृषि विभाग की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में 101.50 करोड़ में से 83.10 करोड़ की राशि इस्तेमाल हो सकी। ग्राम्य विकास विभाग के हाल काबिलेगौर हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना में 49.08 करोड़ में से सिर्फ 1.33 करोड़ यानी 2.72 फीसद खर्च किया गया। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में भी 511 करोड़ खर्च नहीं हो पाए। समाज कल्याण की राष्ट्रीय पारिवारिक योजना में भी सिर्फ 33.90 फीसद राशि का उपयोग किया गया।

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