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बड़ी सोच के साथ होगा ‘एक भारत’ ‘श्रेष्ठ भारत’ का निर्माण, केंद्रीय शिक्षा मंत्री निशंक

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 न्यूज़ वे संपादक देहरादून। शुक्रवार को देहरादून में उत्तराखंड की पंचायती राज संस्थाओं से संपर्क और परिचय कार्यक्रम के अंतर्गत ‘पंचायतीराज व्यवस्था विकेंद्रीकृत शासन व्यवस्था का सशक्तीकरण’ विषय पर आयोजित सम्मेलन के दूसरे सत्र की शुरुआत करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री निशंक ने कहा कि बड़ी सोच के साथ ही एक भारत, श्रेष्ठ भारत का निर्माण होगा। उन्होंने सभी पंचायत प्रतिनिधियों से ईमानदारी, पारदर्शिता और जज्बे के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि स्थानीय सरकार को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाएं। शुक्रवार को देहरादून में उत्तराखंड की पंचायती राज संस्थाओं से संपर्क और परिचय कार्यक्रम के अंतर्गत ‘पंचायतीराज व्यवस्था विकेंद्रीकृत शासन व्यवस्था का सशक्तीकरण’ विषय पर आयोजित सम्मेलन के दूसरे सत्र की शुरुआत करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री निशंक ने यह बात कही।

कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि सीमांत क्षेत्रों में पांच से सात दिन प्रवास करें। वहां सीमा प्रहरी के रूप में रह रहे ग्रामीणों से मुलाकात कर उनका मनोबल बढ़ाएं और उनकी समस्याओं का निस्तारण करें। इससे पलायन भी रुकेगा। उन्होंने कहा कि गांवों के विकास के बिना शहरों का विकास नहीं हो सकता है। विकास के लिए गांव व शहर एक दूसरे से पारस्परिक रूप से जुड़े हुए हैं। पंचायत लोकतंत्र की मूलभूत इकाई है। देवभूमि उत्तराखंड जैसे ऐतिहासिक, पर्यावरणीय व सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य में लोगों तक विकास पहुंचाने और उनकी सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रदेश सरकार गांवों के विकास के लिए हर संभव कदम उठा रही है।

कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि सीमांत क्षेत्रों में पांच से सात दिन प्रवास करें। वहां सीमा प्रहरी के रूप में रह रहे ग्रामीणों से मुलाकात कर उनका मनोबल बढ़ाएं और उनकी समस्याओं का निस्तारण करें। इससे पलायन भी रुकेगा। उन्होंने कहा कि गांवों के विकास के बिना शहरों का विकास नहीं हो सकता है। विकास के लिए गांव व शहर एक दूसरे से पारस्परिक रूप से जुड़े हुए हैं। पंचायत लोकतंत्र की मूलभूत इकाई है। देवभूमि उत्तराखंड जैसे ऐतिहासिक, पर्यावरणीय व सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य में लोगों तक विकास पहुंचाने और उनकी सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रदेश सरकार गांवों के विकास के लिए हर संभव कदम उठा रही है.

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