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उत्तराखंड के 20 साल के इतिहास में त्रिवेंद्र रावत आठ मुख्यमंत्रियों में दूसरे ऐसे हैं तीन साल का कार्यकाल पूरा करने का अवसर हासिल

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18 मार्च, सरकार की तैयारी जश्न की। सूबे में त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार इस दिन अपने कार्यकाल के तीन साल पूरे करने जा रही है। जश्न लाजिमी भी, आखिर उत्तराखंड के 20 साल छोटे से इतिहास में त्रिवेंद्र रावत अब तक के आठ मुख्यमंत्रियों में दूसरे ही ऐसे हैं, जिन्हें बगैर किसी स्पीड ब्रेकर के तीन साल का कार्यकाल पूरा करने का अवसर हासिल हो रहा है। इससे पहले एकमात्र नारायण दत्त तिवारी, जो पूरे पांच साल इस पद पर रहे, उनका रिकार्ड त्रिवेंद्र बराबर करने की ओर बढ़ रहे हैं। सरकार की तैयारी भी जोरदार, लेकिन ऐन मौके पर मानों पनौती लग गई कोरोना की। अब जबकि, कोरोना वायरस का एक मामला भी सामने आ चुका है तो कोई भी चूक भारी पड़ सकती है। लिहाजा, सरकार ने मौके की नजाकत भांप तीसरी सालगिरह के सब कार्यक्रम कैंसिल कर दिए। मायूस न होइए जनाब, सेलिब्रेशन तो कुछ दिन बाद भी हो सकता है।

यूं तो कांग्रेस का बुरा वक्त शुरू हुए अब काफी समय हो चला है, लेकिन ताजातरीन मामला मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार से जुड़ा है। इस सियासी घटनाक्रम से मार्च 2016 में उत्तराखंड में तत्कालीन हरीश रावत सरकार के दौरान हुई पार्टी में टूट की याद ताजा हो गई। कांग्रेस आलाकमान भी शायद इससे भलीभांति वाकिफ है। इसीलिए जब कमलनाथ पर संकट आया तो तुरंत हरीश रावत को सौंप दिया सियासी डिजास्टर मैनेजमेंट का जिम्मा। हरदा ने तब सियासी बिसात पर शातिराना चाल से भाजपा को मात देते हुए अपनी सरकार बचाने में कामयाबी हासिल की थी। लिहाजा, कमल से हाथ को मुक्ति दिलाने और कमलनाथ को अभयदान का मौका देने पहुंच गए जयपुर। हमारी बात हुई तो तड़ से दावा ठोक डाला। बोले, कमलनाथ की सरकार को कोई खतरा नहीं। सभी एमएलए एकजुट हैं और हम सरकार बचा लेंगे। चलिए, जल्द सब क्लियर हो ही जाएगा।

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