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दो महीने बाद बामुश्किल पटरी पर लौटी परिवहन निगम की व्यवस्था को 14 जुलाई की मध्यरात्रि से फिर झटका लगेगा

दो महीने बाद बामुश्किल पटरी पर लौटी परिवहन निगम की व्यवस्था को 14 जुलाई की मध्यरात्रि से फिर झटका लगेगा। जिसका खामियाजा रोडवेज के साथ यात्रियों को भी भुगतना पड़ेगा। रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद गुरुवार देर रात से कार्य बहिष्कार पर चली जाएगी। वहीं, पांच यूनियनों द्वारा बनाया गया संयुक्त मोर्चा 15 जुलाई की रात से कार्य बहिष्कार पर जाएगा। यानी रोडवेज की सभी छह कर्मचारी यूनियन सैलरी समेत अन्य मांगों को लेकर काम करना बंद कर देगी। ऐसे में बसों को चलाने के लिए संकट खड़ा होगा।

रोडवेज कर्मचारियों ने सैलरी को लेकर कई बार मुख्यालय से गुहार लगाई। धरने-प्रदर्शन का दौर भी चला। लेकिन सैलरी जारी करने की बजाय निगम अफसरों ने फरमान निकाला कि संचालन बेहतर होने तक आधी तनख्वाह में काम चलाना होगा। इस आदेश को लेकर रोडवेज के सभी छह संगठनों में खासा आक्रोश है। उनका कहना है कि कर्मचारियों को लेकर निगम इतना असंवेदनशील है कि कोरोना मृतक कर्मचारियों के परिवार को मुआवजा तक नहीं मिला। बीमार की सुध तक नहीं ली गई। अब तुगलकी फरमान निकाल और उत्पीडऩ किया जा रहा है। वहीं, पहाड़ से लेकर दिल्ली तक की बस सेवा कार्य बहिष्कार से अटकेगी।

उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष कमल पपनै व रोडवेज कर्मचारी संयुक्त प्रदेश के मंडल अध्यक्ष आन सिंह जीना का कहना है कि कोविड काल में दिन-रात ड्यूटी करने के बावजूद कर्मचारियों को सैलरी नहीं दी जा रही है। स्थायी, संविदा, विशेष श्रेणी व अफसरों को मिलाकर कुल छह हजार लोग निगम से जुड़े हैं। आर्थिक मंदी के इस दौर में बगैर सैलरी परिवार नहीं पल सकता।

 

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