उत्तराखंड के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा, जब विधानसभा सत्र के दौरान न तो विधानसभा अध्यक्ष और न नेता प्रतिपक्ष होंगे

Facebooktwittermailby feather

उत्तराखंड विधानसभा का मानसून सत्र सिर्फ एक दिन का होगा, जबकि सत्र के दौरान प्रश्नकाल नहीं होगा। विधानसभा में विस उपाध्यक्ष रघुनाथ चौहान की अध्यक्षता में कार्यमंत्रणा समिति एवं सर्वदलीय बैठक में यह निर्णय लिया गया। दरअसल, सरकार ने विधानसभा सत्र 23 से 25 सितंबर के लिए बुलाया था।

लेकिन, राज्य में बढ़ते कोरोना संक्रमण को देख अब 23 सितंबर को सिर्फ एक दिन ही सत्र आयोजित होगा। चौहान ने बताया कि सत्र के दौरान प्रश्नकाल नहीं होगा। इस बैठक में संसदीय कार्य मंत्री की जिम्मेदारी निभा रहे मदन कौशिक, नेता प्रतिपक्ष के प्रतिनिधि के तौर पर विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल, उपनेता-विपक्ष करन माहरा भी शामिल रहे।

विस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष नहीं हो पाएंगे शामिल:
उत्तराखंड के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा, जब विधानसभा सत्र के दौरान न तो विधानसभा अध्यक्ष मौजूद रहेंगे और न नेता प्रतिपक्ष। इसकी वजह है-विस अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल और नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश का कोरोना पॉजिटिव होना। फिलहाल 11 विधायक सत्र की कार्यवाही में भाग नहीं ले पाएंगे। सत्र संचालन विस उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान करेंगे।