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ब्रेकिंग न्यूज़ : 63 साल से किराए के मकान में चल रहा ये दफ्तर, बेघर होने का खतरा

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नैनीताल उत्तराखंड:  उत्तराखंड में पर्यटन को लेकर नई-नई योजनाओं की घोषणा की जा रही है। पर्यटन उत्तराखंड की आर्थिकी का एक अहम हिस्सा है, लेकिन सरकारें इसको लेकर गंभीर नहीं रही हैं। जिसका सबसे बड़ा उदाहरण नैनीताल में पर्यटन विभाग को कार्यालय है। ये कार्यालय देश के आजाद होने के बाद से 1957 से किराए के मकान में चल रहा है। मकान मालिक ने अब पर्यटन विभाग को मकान का कमरा खाली करने का नोटिस थमा दिया है।

सरोवर नगरी नैनीताल देश ही नहीं दुनियाभर के पर्यटकों की पसंद है। सभी पर्यटक स्थलों पर पर्यटन सुविधाओं और विकास जिम्मा भी इसी विभाग के पाय होता है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए स्थापित कार्यालय से पर्यटन विभाग बेघर होने के कगार पर पहुंच गया है। 1957 से किराए के मकान में चल से इस दफ्तर को खाली करने के लिए मकान मालिक ने नोटिस थमा दिया है।

माल रोड पर पर्यटन विभाग का कार्यालय भवन जर्जर हो चुका है। जिला पर्यटन अधिकारी अरविंद गौड़ के अनुसार, मुख्यालय को जानकारी दी जा चुकी है। उन्होंने माना कि शौचालय तक जर्जर है। किराये का भवन होने के कारण मरम्मत में भी हाथ बंधे हैं। राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक इकाई नहीं है। उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद केएमवीएन और जीएमवीएन पर भी इसकी जिम्मेदारी है।

नैनीताल में आग से खाक हुए केएमवीएन मुख्यालय बनाने के लिए पर्यटन विभाग ने पांच करोड़ रुपये दिए हैं। लेकिन, खुद के कार्यालय के लिए उसके पास बजट नहीं है। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि मामला मेरे संज्ञान में नहीं था। अधिकारियों ने भी नहीं बताया। जिला पर्यटन अधिकारी अरविंद गौड़ के अनुसार मार्च में मकान मालिक ने भवन खाली करने का नोटिस दिया था। फिलहाल कोरोना को देखते हुए समय मांगा गया है।

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