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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कर्मचारियों के मसलों का जिम्मा कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक को सौंपा

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लंबित मसलों पर बनी सहमति के बाद भी उनके शासनादेश जारी न होने से नाराज कर्मचारियों से प्रदेश सरकार बात करेगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक को यह जिम्मा सौंपा है।कौशिक 10 व 11 फरवरी को कर्मचारियों के मसले पर बैठकें करेंगे और इन बैठकों में मसलों को लेकर आंदोलन करने वाले उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के नेताओं को बुलाया जाएगा। इस समिति में उत्तराखंड सचिवालय संघ के अध्यक्ष और महासचिव भी शामिल हैं। उन्हें भी बैठक में बुलाया जाएगा। कौशिक ने बैठक बुलाए जाने की पुष्टि की है।पिछले कई महीनों से कर्मचारी संगठन मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं।

प्रदेश में तीन अलग-अलग मोर्चों पर आंदोलन चल रहे हैं। पहला आंदोलन प्रमोशन में आरक्षण के समर्थन और विरोध में लड़ा जा रहा है। दूसरी लड़ाई पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत से हुई वार्ता में बनी सहमति के उन बिंदुओं पर है, जिनके शासनादेश जारी नहीं हुए। उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी समन्वय मंच गत 27 जनवरी को राजधानी में महारैली की। साथ ही एक मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी। सरकार की ओर से मंच को आश्वस्त किया गया कि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार होगा।

इससे पूर्व एससी एसटी इंप्लाइज फेडरेशन ने प्रमोशन में आरक्षण के मसले पर सरकार से मांग की। मुख्यमंत्री ने फेडरेशन को वार्ता का न्योता दिया।इसके बाद सीधी भर्ती के रोस्टर के परीक्षण को लेकर गठित कौशिक समिति की बैठक हुई। लेकिन बैठक में कायदे से चर्चा नहीं हो पाई, इसलिए यह बैठक दोबारा होगी। समिति की बैठक 10 या 11 फरवरी को हो सकती है। इन्हीं तारीखों में से किसी एक दिन कर्मचारियों के मसलों पर भी बात होगी।

कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक की बैठक में समन्वय समिति की ओर से नवीन कांडपाल, सुनील दत्त कोठारी, ठाकुर प्रहलाद सिंह, दीपक जोशी व राकेश जोशी को बुलाया जा सकता है।कर्मचारियों के मुद्दों पर 10 व 11 फरवरी को मैं बैठक करूंगा। इसी दौरान आरक्षण रोस्टर को लेकर भी बैठक होगी। सरकार कर्मचारियों के मसलों को लेकर गंभीर है। प्रकाश पंत की अध्यक्षता में हुई में जिन बिंदुओं पर वार्ता हुई थी, उसमें सचिवालय भत्ता और वे भत्ते शुरू करने की मांग शामिल थी, जिन्हें बंद कर दिया गया। इसके अलावा 10 सूत्रीय मांग पत्र में कुछ ऐसी भी मांगें थी, जिन पर सरकार ने सहमति जता दी थी।

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