Latest:
Home उत्तराखंड राजनीति

बेबी रानी मौर्य जी के निर्देश अनुसार आज से शुरू राजभवन में बसन्तोत्सव

पुष्प का सुख, शान्ति, सौन्दर्य एवं खुशी की अभिव्यक्ति में विशिष्ट स्थान रहा है, जो आज भी जारी है। पूर्व में पुष्पोत्पादन मात्र एक शौक था, परन्तु समय के साथ-साथ इसके उपयोग एवं माॅग में वृृद्धि के कारण यह व्यवसायिक स्वरूप लेता जा रहा है। उत्तराखण्ड राज्य की भौगोलिक परिस्थितियाॅं एवं उपलब्ध जलवायु पुष्पोत्पादन के लिए उपयुक्त है। कम क्षेत्रफल से अधिक आय प्राप्त होने के कारण कृृषकों/उत्पादकों में इसके उत्पादन की अभिरूचि में वृद्धि हो रही है। इस विशिष्टता के दृृष्टिगत इसे बढ़ाये जाने के हर सम्भव प्रयास विभाग द्वारा किये जा रहे हैं, परिणामस्वरूप उत्तराखण्ड राज्य के गठन से पूर्व प्रदेश में मात्र 150 हेक्टेयर में पुष्प उत्पादन होता था, जो वर्तमान में बढ़कर 1663.05 है0 (90 है0 पाॅलीहाउस) क्षेत्रफल हो गया है, जिसमें गुलाब, गेंदा, रजनीगंधा के अतिरिक्त कटफ्लावर के रूप में जरबेरा, कारनेशन, ग्लेडियोलस, लीलियम, आर्किड आदि का प्रमुखता से व्यवसायिक उत्पादन किया जा रहा है। जिसमें से नौ लाख वर्गमी0 क्षेत्रफल में फूलों की संरक्षित खेती नवीनतम तकनीकियों का समावेश करते हुए की जा रही है, जिसमें कुल 3017 मै0टन लूज फ्लावर (गुलाब, गेंदा, रजनीगंधा एवं अन्य) तथा 1914.13 लाख कटफ्लावर का उत्पादन हो रहा है।

Similar Posts

© 2015 News Way· All Rights Reserved.