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शासन ने नई जल नीति के तहत विभागों के कामों का किया बंटवारा

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प्रदेश में अब सरकारी विभाग पानी बचाने से लेकर पानी की मात्रा बढ़ाने के लिए होने वाले कामों से टालमटोल नहीं कर पाएंगे। शासन ने नई जल नीति के तहत विभागों के कामों का बंटवारा कर दिया है। 20 दिसंबर, 2019 को प्रदेश सरकार ने नई जल नीति जारी की थी। इस नीति में यह तो साफ था कि पानी को बचाने से लेकर अन्य मामलों में क्या किया जाना है, लेकिन यह साफ नहीं था कि इस काम को कौन से सरकारी विभाग किस तरह से करेंगे। यही वजह रही कि जल नीति जारी होने के बाद भी सरकारी विभाग चुप्पी साधे हुए थे।

अब इस नीति के हिसाब से सभी विभागों के काम का बंटवारा कर दिया गया है। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने बंटवारे के आदेश को जारी कर दिया है। जल संरक्षण, जल उपलब्धता और पानी की मात्रा बढ़ाने के काम में सभी विभागों को शामिल किया गया है। मसलन विद्यालयी शिक्षा विभाग को छात्रों को जागरूक करने का जिम्मा सौंपा गया है, तो उच्च शिक्षा को शोध कराने को कहा गया है। पेयजल विभाग पीने के पानी को उपलब्ध कराएगा, तो यह भी देखेगा कि पानी को मुफ्त का मानने की धारणा कैसे खत्म हो।

पेयजल विभाग – पीने का साफ पानी , भू जल के दोहन को नियंत्रित करना, सूखे वाले क्षेत्रों के  लिए इमरजेंसी प्लान बनाना, एसटीपी बनाना, सार्वजनिक क्षेत्रों में जल एटीएम लगवाना, पंचायतों की भूमिका तय करना, सतह जल, प्राकृतिक स्रोत आदि का विकास, पानी के मीटर लगाना, पानी के अवैध इस्तेमाल होने पर जुर्माना

सिंचाई विभाग – बांध, बैराज, झील के पानी का अधिकतम उपयोग, नहरों का रखरखाव, बाढ़ नियंत्रण का मास्टर प्लान, झील, तालाब आदि का सुधार, जल प्रवाह पर अतिक्रमण को हटाना, नदियों से उपखनिज की निकासी, जल प्रबंधन का प्रशिक्षण 

पर्यावरण संरक्षण बोर्ड – नदियों में न्यूनतम जल प्रवाह, उद्योगाें के स्तर से भूजल के अनियंत्रित दोहन को रोकना, उद्योगों को अब स्पष्ट रूप से बताना होगा कि भू-जल रिचार्ज के लिए उन्होंने क्या किया, गंदे जल को नदियों में सीधे प्रवाहित होने से रोकने के उपाय

कृषि एवं उद्यान – कम पानी में खेती, जैविक खेती को बढ़ावा, नदियों के किनारे वनीकरण, सूखे से प्रभावित क्षेत्रों का मास्टर प्लान,

वन विभाग – बांज, बुरांस आदि चौड़ी पत्तियों वाले पेड़ों के पौधों को लगाना, रिजर्व वन क्षेत्रों मेें जल संचयन, नदियों को पुनर्जीवित करना

ऊर्जा विभाग – हाइड्रो प्रोजेक्ट को प्रोत्साहित करना, घराटों का सुधार, सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप सेटों का उपयोग

विद्यालयी शिक्षा – जागरूकता योजनाओं को पाठ्यक्रम में शामिल करना

उच्च शिक्षा – जल नीति एवं मौसम में बदलाव के आधार पर शोध, प्रशिक्षण

राजस्व विभाग या जिला प्रशासन – नदियों, झीलों, तालाबों को अतिक्रमण से मुक्त कराना, विवाद समाधान समिति का गठन   

पंचायत विभाग – जल संरक्षण के लिए मनरेगा आदि में प्रावधान

नियोजन – जल संसाधन, प्राकृतिक स्रोतों की डिजीटल मैपिंग

शहरी विकास विभाग – ड्रेनेज मास्टर प्लान

ग्राम्य विकास विभाग – गांवों का वाटर बजट तैयार करना

जल संरक्षण की  जरूरत

– बारिश से मिलने वाले कुल पानी का बहुत ही कम उपयोग राज्य में होता है। 97 प्रतिशत से अधिक पानी नदियों और नालों के जरिए बह जाता है।
– प्राकृतिक स्रोत तेजी से सूख रहे हैं। इससे कई पर्वतीय जिलों में पानी का संकट है। शहरों में मानक के हिसाब से लोगाें को पानी नहीं मिल रहा है।
– भूजल का उपयोग कई जिलाें में खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है।

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