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वनस्पति वैज्ञानियों ने किया पिथौरागढ़ के जौलजीवी क्षेत्र में संजीवनी बूटी खोज निकालने का दावा

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उत्तराखंड के चमोली जिले में द्रोणगिरी पर्वत पर सजीवन बूटी पाए जाने के दावों के बाद अब वन अनुसंधान शाखा के वनस्पति वैज्ञानियों ने पिथौरागढ़ के जौलजीवी क्षेत्र में संजीवनी बूटी खोज निकालने का दावा किया है। वन अनुसंधान शाखा के वनस्पति वैज्ञानियों के दावों की पुष्टि के लिए इस बूटी को लखनऊ स्थित नेशनल बाटेनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी एनबीआरआई भेजा जा रहा है। ताकि इसके रसायनिक गुणों की जांच कर इस बात की जानकारी हासिल की जा सके, कि खोजी गई जड़ी बूटी संजीवनी बूटी है या नही?संजीवनी बूटी की खोज का दावा कर रहे वैज्ञानियों का मानना है कि पिथौरागढ़ के जौलजीवी क्षेत्र में खोजी गई जड़ी बूटी चमोली क्षेत्र के द्रोणगिरी पर्वत पर पायी जाने वाली जड़ी बूटी से हुबहू मेल खाती है। बहरहाल विज्ञानियों द्वारा खोजी गई संजीवनी बूटी को वन अनुसंधान शाखा की हल्द्वानी स्थित नर्सरी में संरक्षित रखा जा रहा है। वन अनुसंधान शाखा के निदेशक व वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी ने बताया कि संस्थान के वैज्ञानियों द्वारा जौलजीवी में जो जड़ी बूटी खोजी गई है। उसकी विशेषता ये है कि वह अमूमन सूखी घास जैसी दिखती है। उसे जैसे ही पानी में डाला जाता है, तो वह पूरी तरह हरी हो जाती है। 

उसके इसी गुण का वैज्ञानिकों द्वारा अध्ययन किया जा रहा है। इस बात को लेकर शोध किया जा रहा है कि आखिरकार जड़ी बूटी में ऐसे कौन से रसायनिक तत्व हैं जो पानी के संपर्क में आते ही जड़ी बूटी को हरा भरा बना देते हैं। धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीराम व रावण के बीच हुए युद्ध के दौरान मेघनाथ ने वीरघातिनी शक्ति का प्रयोग कर दिया था। जिसके लगने से लक्ष्मण बेहोश हो गए थेे। लक्ष्मण को होश में लाने को सुषेन वैद्य को बुलाया गया था। वैद्य ने बताया कि द्रोणगिरी पर्वत पर सजीवन बूटी पाई जाती है और यदि यह बूटी लाई जाय तो लक्ष्मण को मूर्छा से बाहर लाया जा सकता है। ऐसी मान्यता है कि हनुमान संजीवनी बूटी के चक्कर में द्रोणगिरी पर्वत का एक हिस्सा उखाड़कर लंका ले गए थे और सुषेन वैद्य ने संजीवनी बूटी की मदद से लक्ष्मण को ठीक कर दिया था। रामायण काल से लेकर आज तक संजीवनी बूटी की लगातार खोज की जा रही है। पिथौरागढ़ के जौलजीवी क्षेत्र में अद्भुत जड़ीबूटी की खोज की गई है। जो द्रोणगिरी पर्वत पर मिलने वाली तथाकथित संजीवनी जड़ी बूटी से हूबहू मिलती जुलती है। जड़ी बूटी के रसायनिक गुणों की जांच की जा रही है। गुणों का पता लगाने के बाद ही हकीकत का पता चलेगा। फिलहाल खोजी गई जड़ी बूटी संस्थान की नर्सरी में संरक्षित किया जा रहा है।


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