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आइपीएस के युवा अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे पुलिस विभाग की बेहतर छवि बनाने के लिए प्रयास करें; केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

भारतीय पुलिस सेवा (आइपीएस) के युवा अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे पुलिस विभाग की बेहतर छवि बनाने के लिए प्रयास करें। वे ऐसे कार्य करें जिससे जनता के बीच पुलिस की छवि बेहतर बनकर उभरे। यह बात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कही है।आइपीएस के 72 वें बैच के अधिकारियों को वीडियो लिंक के जरिये संबोधित करते हुए शाह ने कहा, पुलिस पर लगने वाले कार्रवाई न करने या अतिरेक कार्रवाई करने के आरोपों से अलग हटकर सही और जरूरी कार्रवाई करने वाली छवि विकसित की जाए। सही और जरूरी कार्रवाई का मतलब स्वाभाविक कार्रवाई होती है, जो हर किसी की समझ में आ जाती है। पुलिस कानून जानती है, इसलिए वह उसके दायरे में रहते हुए सही लगने वाला कार्य कर सकती है। इसलिए अपनी छवि को बेहतर बनाने का कार्य खुद पुलिसकर्मी ही कर सकते हैं।

गृह मंत्री ने कहा, संवाद और संवेदनशीलता, ऐसे मूल बिंदु हैं जिनको व्यवहार में लाकर पुलिस अपनी छवि को बेहतर बना सकती है। इसलिए सभी पुलिसकर्मियों को जनता से अपना संवाद बढ़ाना चाहिए। उनके बीच पैठ स्थापित करनी चाहिए। इससे अपराध भी रुकेंगे और अपराधी भी बच नहीं पाएंगे। क्योंकि जनसंपर्क के बगैर किसी अपराध को करने वाले को ढूंढ़ पाना बहुत मुश्किल होता है। इसलिए पुलिस अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को चाहिए कि वे तहसील और ग्राम स्तर पर जाकर लोगों से मिलें, उनका विश्वास प्राप्त करें। एसपी और डीएसपी स्तर के अधिकारी ग्रामीण इलाकों में जाकर रात गुजारें। लेकिन आइपीएस समेत अखिल भारतीय सेवाओं से जुड़े सभी अधिकारी प्रचार से भी दूर रहें, इससे वे बेहतर प्रशासन देने में सफल हो पाएंगे। गृह मंत्रालय की ओर जारी बयान में यह जानकारी दी गई है।

शाह ने अधिकारियों से अनुरोध किया कि वे इंटरनेट मीडिया से जरूरी जानकारी तो लें लेकिन उसका हिस्सा न बनें। इससे वे बेवजह की बहस में पड़े बगैर बेहतर तरीके से अपनी जिम्मेदारी पूरी कर पाएंगे। पुलिस कांस्टेबलों के कल्याण वाले कार्यो पर जोर देते हुए शाह ने कहा कि पुलिस अधिकारी उनके लिए जीवन भर कार्य कर सकते हैं। कहा कि कांस्टेबल पुलिस बल की 85 प्रतिशत ताकत हैं। वह पुलिस विभाग का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। जमीन पर वे कानून के सबसे बड़े रक्षक होते हैं। अगर हम उनके कल्याण के कार्यो पर ध्यान देंगे तो बाकी का 15 प्रतिशत पुलिस विभाग बेहतर तरीके से देश और समाज की सेवा कर सकेगा।

 

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