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उत्तराखंड सरकार ने आरक्षित वर्ग को खुश करने के लिए सीधी भर्ती के रोस्टर में संशोधन का फैसला; लटक सकती छह हजार पदों की भर्ती

उत्तराखंड सरकार ने आरक्षित वर्ग को खुश करने के लिए सीधी भर्ती के रोस्टर में संशोधन का फैसला तो कर दिया है, लेकिन उसके इस निर्णय से अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में करीब छह हजार पदों की भर्ती लटक सकती है। हालांकि सरकार की ओर से जारी आदेश में आयोग को भेजे गए पदों के बारे में कोई जिक्र नहीं है।लेकिन उत्तराखंड एससी एसटी इंप्लाइज फेडरेशन ने मांग उठाई है कि लोक सेवा आयोग और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को भेजे गए सीधी भर्ती के प्रस्ताव को नए सिरे से तैयार करके भेजा जाए। ऐसा न होने पर फेडरेशन ने कोर्ट जाने की चेतावनी दी है।

प्रदेश सरकार ने 11 सितंबर 2019 को सीधी भर्ती के रोस्टर में बदलाव का फैसला किया था। इसके तहत एससी को 19 प्रतिशत, ओबीसी को 14 प्रतिशत, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति को चार प्रतिशत आरक्षण के तहत नए सिरे से पद तय किए गए थे।पुराने रोस्टर में पहले पद पर एससी को हटाकर उसे सामान्य वर्ग के लिए कर दिया गया था। एससी का पद रोस्टर में छठा पद रखा गया था। एसटी का पद 24वें स्थान में 25वां स्थान पर खिसक गया था। नया रोस्टर निर्धारित होने पर आयोग ने पहले से प्राप्त भर्ती वाले पदों का प्रस्ताव विभागों को लौटा दिया था। सरकार ने विभागों को नए रोस्टर के हिसाब से भर्ती वाले पदों के प्रस्ताव भेजे।

अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के सचिव संतोष बड़ोनी के मुताबिक, आयोग के पास करीब छह हजार पदों के प्रस्ताव हैं, जिनमें से 2000 से अधिक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। बड़ोनी का कहना है कि अभी शासन की ओर से भर्ती को लेकर कोई निर्देश नहीं है, इसलिए प्रस्ताव के तहत कार्रवाई जारी रहेगी।लेकिन उधर, एससी एसटी इंप्लाइज फेडरेशन ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि रोस्टर में एससी का पहला पद एससी के निर्धारित होने के बाद शासन को तत्काल प्रभाव से आयोगों में भर्ती के लिए भेजे गए पदों के प्रस्ताव वापस बुलाकर उन्हें संशोधित रोस्टर के तहत तैयार कर भेजे जाने चाहिए। यदि सरकार ऐसा नहीं करेगी तो फिर फेडरेशन इसका विरोध करेगी और जरूरत पड़ी तो अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा।

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