प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लद्दाख क्षेत्र में बौद्ध अध्ययन पर आधारित केन्द्रीय विश्वविद्यालय को दी मंजूरी

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जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को हटाने के बाद लद्दाख को एक केन्द्र शासित प्रदेश के रूप में गठित किया गया है। लद्दाख क्षेत्र में बौद्ध धर्म के लोग अधिक संख्या में रहते हैं इसलिए संसदीय अधिनियम की एक वर्ष पूरी होने से पहले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लद्दाख क्षेत्र के लिए बौद्ध अध्ययन पर आधारित पहले केन्द्रीय विश्वविद्यालय को मंजूरी दे दी है। यह महाविद्यालय इंजीनियरिंग और मेडिकल की डिग्री नहीं देगा। लद्दाख महाविद्यालय उदार कला और बुनियादी विज्ञान और अन्य सभी प्रकार के शैक्षणिक कोर्सों की डिग्री देगा। केन्द्रीय महाविद्यालय को मंजूरी मिलने के बाद लद्दाख क्षेत्र के दस हजार से अधिक छात्रों में खुशी की लहर दौड गई है, क्योंकि लद्दाख के छात्रोें को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए घर से दूर जाने के लिए मजबूर होना पडता था।

अब शिक्षा मंत्रालय केन्द्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की कार्यवाही को पूरा करेगा। लद्दाख को यह पहला विश्वविद्यालय मिला है जो लद्दाख के पूर्व में संचालित काॅलेजों को संगठित करके बनाया गया है। केन्द्रीय विश्वविद्यालय की मांग को लेकर राज्य विधानसभा ने 2018 में एक कानून का निर्माण किया था। लद्दाख विश्वविद्यालय के द्वारा हिमाचल प्रदेश के दो जिले लाहौल और स्पीति के छात्र भी लाभान्वित होंगे। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक साल में किये गये कार्यों की समीक्षा के लिए एक बैठक का आयोजन किया गया जिसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और सभी उच्च स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।