इस बाबत ममता सरकार ने नाराजगी जताते हुए केंद्र को पत्र लिखा है, जिसमें पुनर्विचार करने अनुरोध किया गया है। परंतु यहां सवाल यह उठ रहा है कि आखिर एक साथ 9.5 लाख नाम खारिज क्यों हुए? यह जरूरी है कि एक भी असली किसान इस योजना से वंचित नहीं हो। क्योंकि सियासी नफा-नुकसान देखने की वजह से पहले ही बंगाल के 70 लाख से अधिक किसानों को किसान सम्मान निधि नहीं मिल सका था। अब जब योजना शुरू हुई है तो इस पर राजनीति बंद होनी चाहिए और केंद्र व राज्य सरकार को चाहिए कि योजना के लाभ से कोई वंचित न हो।