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कोयले की किल्लत के चलते देशभर में बिजली आपूर्ति में भारी कमी देखने को मिल रही; जाने पूरी खबर

कोयले की किल्लत के चलते देशभर में बिजली आपूर्ति में भारी कमी देखने को मिल रही है। इस संकट से उत्तराखंड भी अछूता नहीं दिख रहा। इस समय राज्य को 41.5 मिलियन यूनिट (4.15 करोड़ यूनिट) बिजली की जरूरत है, जबकि उपलब्धता 37 मिलियन यूनिट (3.7 करोड़ यूनिट) की है। इस तरह 4.5 मिलियन यूनिट (45 लाख यूनिट) बिजली रोजाना कम पड़ रही है।ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता (संचालन) गौरव शर्मा के मुताबिक, चौतरफा बिजली किल्लत के चलते सेंट्रल पूल से मिलने वाली बिजली में भी कटौती की गई है। सितंबर के आखिरी सप्ताह तक सेंट्रल पूल से 16.60 मिलियन यूनिट (एमयू) से अधिक बिजली उत्तराखंड को मिल रही थी और अब यह आंकड़ा 14 से 15 एमयू के बीच सिमटता दिख रहा है। त्योहारी सीजन शुरू हो चुका है और राज्य की मांग में पांच फीसद की बढ़ोत्तरी अभी दर्ज की गई है। इसके सापेक्ष बिजली आपूर्ति 10 फीसद तक घट गई है। आने वाले दिनों में मांग में और इजाफा होने का अनुमान है। ऊर्जा निगम अपने स्तर से बिजली किल्लत को दूर करने के हरसंभव प्रयास कर रहा है, मगर चुनौती भी निरंतर बढ़ रही है।देशभर में बिजली किल्लत और मांग बढऩे के चलते विभिन्न पावर प्लांट से मिलने वाली बिजली की कीमत प्रति यूनिट 16 रुपये तक बढ़ गई है। ऊर्जा निगम को उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने आदेश दिए हैं कि वह किसी भी कीमत पर चार रुपये प्रति यूनिट से अधिक की बिजली न खरीदे।

यदि विशेष परिस्थितियों में इससे अधिक दर पर बिजली खरीदनी जरूरी हो तो उसके लिए आयोग से अनुमति प्राप्त करनी होती है। यह भी एक कारण है कि बिजली आपूर्ति को लेकर चुनौती बढ़ रही है।बिजली किल्लत की आशंका को देखते हुए ऊर्जा निगम पहले से ही प्रयास कर रहा था कि निजी कंपनियों से कम दर पर बिजली प्राप्त कर ली जाए। यह दर भी छह रुपये प्रति यूनिट होगी और इसके लिए निगम को आयोग से अनुमति लेनी पड़ी। ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता (संचालन) गौरव शर्मा के मुताबिक, जिंदल पावर प्लांट से 2.4 एमयू (100 मेगावाट) व टाटा पावर से 1.8 एमयू का अनुबंध अक्टूबर माह के लिए किया गया था। बीते शुक्रवार को किए गए अनुबंध के सापेक्ष अब मंगलवार से बिजली मिलने की उम्मीद है। क्योंकि जिंदल पावर प्लांट ने तकनीकी खामी का हवाला देते हुए हाथ खड़े कर दिए थे और सोमवार देर शाम को ही साफ किया गया कि अब बिजली दी जा सकती है। दूसरी तरफ टाटा पावर ने 1.8 एमयू के सापेक्ष 1.1 एमयू बिजली देने पर ही हामी भरी है। उम्मीद की जा रही है कि मंगलवार से हालात कुछ काबू में आ पाएंगे।25 सितंबर की बात करें तो उत्तराखंड जलविद्युत निगम लि. की विभिन्न परियोजनाओं समेत अन्य परियोजनाओं से 29.17 मिलियन यूनिट के करीब बिजली मिल पा रही थी। अब सात अक्टूबर का ग्राफ देखा जाए तो यह आपूर्ति 21.336 एमयू के करीब पहुंच गई है। नदियों में डिस्चार्ज कम हो जाने के चलते अब पूरी सर्दी ऐसे ही हालात रहेंगे। इसके अलावा गैस/तेल के दाम बढ़ने के कारण गैस के पावर प्लांट से भी अपेक्षित उत्पादन नहीं हो पा रहा है। सर्दियो में सूरज की ऊष्मा का प्रभाव कम होने के चलते सोलर प्लांट पर भी असर पड़ रहा है।

 

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