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प्रदेश स्तर के पदाधिकारी भी बड़े आयोजनों में सिर्फ भाषण देने के बजाय बूथों व मंडलों में नजर आए; जाने पूरी खबर

पीएम नरेंद्र मोदी का जन्म दिन हो या फिर अंत्योदय योजना के प्रणेता दीनदयाल उपाध्याय की जयंती। पार्टी के कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि प्रदेश स्तर के पदाधिकारी भी बड़े आयोजनों में सिर्फ भाषण देने के बजाय बूथों व मंडलों में नजर आए। मिशन-2022 फतह के लिए माइक्रो प्लानिंग को लेकर छोटे-छोटे आयोजनों के जरिये घर-घर पैठ बनाने में जुटे हैं। फेस टू फेस संपर्क अभियान को चुनावी हथियार बनाया गया है, ताकि विपक्ष को मात दी जा सके। हाईकमान की रणनीति के तहत आगामी कार्यक्रमों को लेकर भी इसी तरह की तैयारी है।पीएम नरेंद्र मोदी के 17 सितंबर को जन्म दिवस पर ऐसा लगा रहा था कि भाजपा की ओर से बड़े आयोजन होंगे। बड़ी सभाएं होंगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नजर नहीं आया। जबकि चुनावी माहौल में बड़े आयोजनों की परंपरा रही है। इसके इतर भाजपा ने मिशन-2022 फतह करने के लिए माइक्रो प्लान पर फोकस किया है। इसके लिए भाजपा के कार्यकर्ता से लेकर प्रदेश पदाधिकारी जुटे हुए हैं। पीएम के जन्म दिन पर राजपुरा कुष्ठ आश्रम में मिष्ठान, फल आदि वितरित किया गया तो ऐसे ही अन्य जगह छोटे-छोटे आयोजन हुए। इसके तहत स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित हो रहे हैं। यानी सीधे जनता से जुड़ाव।

जिससे मोदी चेहरे को मजबूत बनाए रखा जाए। इसी तरह का आयोजन 25 सितंबर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर दिखा। तब भी पार्टी पदाधिकारी मंडल से छोटे बूथ स्तरों पर नजर आए। बूथ पर केंद्र व राज्य की योजनाओं के बारे में जानकारी दी जा रही थी। अब दो अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती है।जिलाध्यक्ष प्रदीप बिष्ट बताते हैं, पार्टी का ध्यान बूथ पर है। पार्टी का मंत्र भी है, बूथ जीता, चुनाव जीता। इसी को सार्थक करने के लिए हम सभी का ध्यान बूथ स्तर के आयोजनों पर है, जहां लोगों से सीधे कनेक्ट हुआ जा सकता है। दो अक्टूबर को भी बड़े आयोजन के बजाय गली-गली व मोहल्लों में जाकर स्वच्छता अभियान चलाया जाना है। लोगों को मोदी सरकार की योजनाओं से न केवल जोडऩा है, जो पहले से ही जुड़े हैं, उनको भी योजनाओं के महत्व से अवगत कराना है। जिले में 19 मंडल हैं, जिनमें 943 बूथ हैं। जबकि राज्य में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में जुटी है। चुनाव का समय अब कम रहा गया है, लेकिन भाजपा की तरह संगठन तैयार नहीं कर सकी है। आम आदमी पार्टी का ढांचा ऊपरी स्तर से मजबूत है, लेकिन वार्ड व बूथ स्तर पर भाजपा के समान संगठन तैयार नहीं हो सका है। फिलहाल सभी दल अपने-अपने स्तर पर जोर आजमाइश में हैं।

 

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