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हरक सिंह रावत के अलग स्वास्थ्य मंत्री बनाने की पैरवी को लेकर सूबे में गर्माई सियासत

 कैबिनेट मंत्री डा हरक सिंह रावत के अलग स्वास्थ्य मंत्री बनाने की पैरवी को लेकर बयान ने सूबे में सियासत को गर्मा दिया है। इससे कांग्रेस को कोरोना महामारी से जंग लड़ रही सरकार पर हमले का मौका मिल गया है। बयान को मुद्दा बनाकर पार्टी ने मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को निशाने पर लेते हुए उनके नेतृत्व और निर्णय क्षमता पर सवाल दाग दिए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि सरकार पर लगाए जा रहे विपक्ष के आरोपों को मंत्री ने सही साबित कर दिया है। कोरोना से निपटने में सरकार फेल हो चुकी है।

प्रदेश में लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमण की वजह से सरकार पहले से ही विपक्ष के ताबड़तोड़ हमले झेल रही है। ऐसे नाजुक मौके पर वन मंत्री डा हरक सिंह रावत के बयान को कांग्रेस ने हाथोंहाथ लेने में देर नहीं लगाई। बीते मार्च माह में नेतृत्व परिवर्तन के बाद से ही कांग्रेस के तेवर आक्रामक हैं। भाजपा सरकार में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अपनी पीठ थपथपाती रही प्रमुख प्रतिपक्षी पार्टी के निशाने पर अब मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि कोरोना से निपटने में सरकार की अनिर्णय की स्थिति आड़े आ रही है। कांग्रेस इस बात को उठा रही है। अब सरकार के मंत्री इस सच को स्वीकार करने लगे हैं। कोरोना संकट में सरकार के भीतर मतभेद उभरने से ये भी साबित हो गया कि कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने को लेकर सरकार के पास कोई कारगर नीति नहीं है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व पर उनके ही सहयोगी सवाल उठाने लगे हैं। मंत्रिमंडल के भीतर अलग-अलग सुर हैं। इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है।

प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि वन मंत्री हरक सिंह रावत ने यह स्वीकार कर लिया है कि सरकार ने इस संकट से निपटने को तैयारी नहीं की। कोरोना की पहली और दूसरी लहर के बीच मिले समय का सदुपयोग करने में सरकार विफल रही है। भाजपा सरकार के पूर्व और वर्तमान मुख्यमंत्री से कांग्रेस लगातार कहती रही है कि स्वतंत्र प्रभार वाला अलग स्वास्थ्य मंत्री बनाया जाना चाहिए। सरकार की नाकामी की वजह से राज्य मृत्यु दर में अग्रणी राज्यों में पहुंच गया है। लिहाजा सरकार को शासन करने का अधिकार नहीं है।

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