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प्रधानमंत्री मोदी ने परिचय के दौरान कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत से पूछ डाला, बताइए हरकजी, कैसे चल रही है आपकी हनक

ऋषिकेश पहुंचे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने परिचय के दौरान सूबे के कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत से पूछ डाला, बताइए हरकजी, कैसे चल रही है आपकी हनक। सियासी गलियारों में इस पर तमाम तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिली, मगर कांग्रेस महासचिव व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का अंदाज सबसे निराला था। हरदा बोले, एक मंत्री को हनक सिंह कहकर प्रधानमंत्री कई मंत्रियों को चक्कर में डाल गए कि हनक शब्द तारीफ है या कुछ और संकेत। अब हरदा के तंज पर हरक खामोश रहें, यह तो हो नहीं सकता। लिहाजा पलट कर जवाब दिया, उन्हें तो बधाई देनी चाहिए, देश के प्रधानमंत्री ने उनके छोटे भाई की पीठ थपथपाई। हरक यहीं नहीं थमे, हरदा की दुखती रग पर हाथ धर ही दिया, यह कहकर कि बड़े भाई हरीश रावत पिछले विधानसभा चुनाव में दो-दो सीटों से चुनाव क्यों हार गए, उन्हें तो यह भी आज तक समझ नहीं आया।इन दिनों मंत्री हों या फिर विधायक, सब अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय दिख रहे हैं। कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल नरेंद्र नगर, तो यशपाल आर्य बाजपुर को पूरा वक्त दे रहे हैं। हरक सिंह रावत का विधानसभा क्षेत्र कोटद्वार राजधानी देहरादून से दो-ढाई घंटे की दूरी पर ही है, लेकिन इसके बावजूद उनका ज्यादा वक्त आजकल कोटद्वार में ही गुजर रहा है। बंशीधर भगत, बिशन सिंह चुफाल, रेखा आर्य, धन सिंह रावत की व्यस्तता भी इन दिनों अपने क्षेत्र में ही नजर आ रही है। ये महज कुछ उदाहरण हैं,  स्थिति यह है कि लगभग सभी विधायकों ने अब विधानसभा चुनाव की तैयारी में खुद को पूरी तरह झोंक दिया है। वैसे भी चुनाव को लगभग चार ही महीने का वक्त बचा है, इसमें से भी कुछ समय आचार संहिता में गुजरेगा। यानी, आखिरी वक्त में मतदाता के लिए कुछ कर गुजरने को अब दो ढाई महीने ही शेष हैं।

विधानसभा चुनाव से पहले पालाबदल के खेल में भाजपा ने हैट्रिक बना डाली। पिछले कुछ हफ्तों के दौरान तीन विधायकों ने भाजपा का दामन थामा। पहले धनोल्टी से निर्दलीय विधायक और पिछली कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे प्रीतम सिंह पंवार आए, तो पुरोला से कांग्रेस विधायक राजकुमार भी पीछे-पीछे आ पहुंचे। दरअसल राजकुमार पहले भाजपा में ही थे, मगर पिछली बार टिकट न मिलने पर इन्होंने हाथ थाम लिया था। तीसरा नंबर रहा भीमताल से निर्दलीय विधायक राम सिंह कैड़ा का, वह पार्टी के एसोसिएट सदस्य काफी पहले बन चुके थे। भाजपा विधायकों के संपर्क में होने के बढ़-चढ़कर दावे करने वाले कांग्रेस के नेता फिलहाल खामोशी ओढ़े हुए हैं। लगता है उन्हें भी अंदाजा हो गया कि हवा किस तरफ बह रही है। थोड़ा-बहुत उम्मीद उन पर टिकी है, जिन्हें इस बार भाजपा टिकट नहीं देगी। मुमकिन है तब कुछ नेता कांग्रेस की कश्ती में सवार हो जाएं।

कोशिश तो काफी कर रही है कांग्रेस, लेकिन उसकी देशभर में जो स्थिति है, कमोबेश वैसा ही हाल सूबे में भी दिख रहा है। पिछले चुनाव में 70 में से 11 सीटों पर ही कांग्रेस जीत दर्ज कर पाई, लेकिन पौने पांच साल गुजर गए, लगता नहीं इससे कोई सबक पार्टी ने लिया। हाईकमान के करीबी पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत राष्ट्रीय महासचिव भी हैं, तो मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में कोई उनके अलावा कोई नहीं दिखता। यह तो ठीक, मगर रावत अब इससे खासे आत्ममुग्ध नजर आ रहे हैं। हर चुनाव से पहले आने वाले कुछ सर्वेक्षणों में रावत को अगले मुख्यमंत्री के रूप में सबसे उपयुक्त बताए जाने पर रावत इंटरनेट मीडिया में अपनी प्रसन्नता छिपा नहीं पाए। अतिरेक में शायद वह इस बात को नजरअंदाज कर गए कि इन्हीं सर्वेक्षण में कांग्रेस सत्ता के आसपास भी नहीं फटक रही है। बहुमत मिला तो ही बनेंगे न मुख्यमंत्री।

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