उत्तराखंड में स्थित ब्रह्म वाटिका से विशेष लगाव रखते है पीएम मोदी, जाने क्या है खासियत

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उत्तराखंड: दरअसल, 16-17 जून 2013 की प्रलयकारी केदारनाथ आपदा के दौरान वन विभाग की चौकी बह गयी थी. वन विभाग की चौकी न होने से केदारनाथ क्षेत्र में ब्रहमकमल का बेवजह दोहन किया जा रहा था. हिमालयी क्षेत्रों में मानवीय गतिविधियां भी बढ़ती जा रही थी. ऐसे में केदारनाथ धाम में वन अपराध नियंत्रण चौकी का निर्माण किया जाना बेहद जरूरी. केदारनाथ  थाआपदा के बाद जैसे ही नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने केदारनाथ धाम में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों का जिम्मा अपने कंधों पर ले लिया. जिसके दौरान पीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत केदारनाथ धाम में पांच कार्य होने हैं. जिनमें दो कार्य पहले ही हो चुके हैं और तीन कार्यों में आस्था पथ का कार्य पिछले माह ही पूरा हुआ. वहीं शंकराचार्य समाधि स्थल का कार्य दूसरे चरण में है. इसके अलावा तीर्थ पुरोहितों के भवनों का कार्य भी जारी है. बता दें कि पांच भवनों में से तीन भवनों का कार्य पहले ही पूरा हो चुका है जिन्हें तीर्थ पुरोहितों को सौंप दिया गया है. जबकि दो भवन अगले माह तक बनकर तैयार हो जायेंगे.

साथ ही जिलाधिकारी वंदना सिंह ने बताया कि बेस कैंप के समीप लगभग 50 लाख की लागत से तीन भवनों वाली इस चौकी के जरिए ब्रह्मवाटिका का संरक्षण किया जायेगा. यहां पर तीन सौ वर्ग मीटर के दायरे में ब्रह्मवाटिका लगाई जाएगी. ब्रह्मवाटिका के संरक्षण के साथ ही चौकी में हिमालय क्षेत्र के वन्य जीव और वनस्पतियों की सुरक्षा व उपचार के लिए जरूरी उपकरण भी रखे जाएंगे. उन्होंने बताया कि विषम परिस्थितियों में रेंज कार्यालय ऊखीमठ व प्रभागीय कार्यालय गोपेश्वर को तत्काल सूचना पहुंचाने के लिए यहां वायरलेस स्टेशन व कंट्रोल रूम भी बनाए गए हैं. चौकी में फॉरेस्टर गार्ड और दो फॉरेस्टर वॉचर की तैनाती भी अक्टूबर के पहले सप्ताह तक हो जाएगी. जिलाधिकारी के मुताबिक ये कर्मचारी वन्य जीवों की सुरक्षा व इलाज के साथ प्रस्तावित ब्रह्मवाटिका के संरक्षण में अहम भूमिका निभाएंगे साथ ही उच्च हिमालय क्षेत्र में वानिकी कार्यों को बढ़ावा देंगे.