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बड़ा सवाल ? चुनावी साल में सर्वप्रिय हो चुके एनडी की राजनीतिक विरासत भी किसी के हाथ में होगी ? जाने पूरी खबर

उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक की सियासत में कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे स्व. पंडित नारायण दत्त तिवारी की धाक रही। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी रहे। हाल में एनडी सत्तारूढ़ भाजपा के भी प्रिय हो गए। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने उनके नाम पर रुद्रपुर सिडकुल का नाम रखने की घोषणा की। इसके बाद कांग्रेस ने उनके पैतृक गांव पदमपुरी में पदयात्रा करने के साथ उनके परिवार के लोगों को सम्मानित भी किया। मगर बड़ा सवाल यह है कि चुनावी साल में सर्वप्रिय हो चुके एनडी की राजनीतिक विरासत भी किसी के हाथ में होगी। जीते जी वह बेटे रोहित शेखर तिवारी को टिकट नहीं दिला सके थे।  2012 में पार्टी ने भतीजे मनीषी तिवारी को गदरपुर से चुनाव लड़ाया था। मगर मनीषी जीत नहीं सके।राजनीतिक जीवन की शुरुआत में ही एनडी का सानिध्य मिलने पर कई लोगों ने बड़ा मुकाम भी हासिल किया। हल्द्वानी से लेकर उत्तर प्रदेश तक ऐसे कई नाम है। लेकिन अंतिम समय में वह शारीरिक तौर पर कमजोर होने के कारण वह बेटे रोहित शेखर को टिकट नहीं दिलवा सके।

2017 के चुनाव में वह परिवार संग काफी दिनों तक हल्द्वानी व आसपास के इलाकों में कुछ सक्रिय भी नजर आए। तब रोहित के हल्द्वानी या लालकुआं विधानसभा से चुनाव लडऩे की खासा चर्चाएं भी हुई। लेकिन कांग्रेस से टिकट नहीं मिला। कयास अन्य किसी पार्टी से चुनावी मैदान में उतरने के भी लगाए गए। लेकिन नतीजा सिफर रहा।मगर अब चुनावी दौर आते ही पूर्व सीएम स्व. एनडी तिवारी हर किसी खासकर सियासी दलों को याद आने लगे हैं। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि क्या कोई उनकी राजनैतिक विरासत को आगे लेकर जाएगा। बात अगर पारिवारिक सदस्य की करें तो कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता दीपक बल्यूटिया हल्द्वानी सीट पर खासा सक्रिय हैं। उन्होंने केंद्रीय पर्यवेक्षकों के समक्ष टिकट की इच्छा भी जाहिर कर दी। लेकिन नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश के निधन के बाद बेटे सुमित हृदयेश उनकी विरासत को आगे बढ़ाने की पुरजोर कोशिश में जुटे हैं। हालांकि, टिकट समेत अन्य कई सवाल अभी भविष्य के गर्भ में है।

 

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