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नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत उत्तराखंड को जल्द ही 409 करोड़ रुपये की सौगात मिलने की उम्मीद जगी

राष्ट्रीय नदी गंगा की स्वच्छता एवं निर्मलता के लिए चल रही नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत उत्तराखंड को जल्द ही 409 करोड़ रुपये की सौगात मिलने की उम्मीद जगी है। केदारनाथ यात्रा के पहले पड़ाव गौरीकुंड समेत प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), सीवर लाइन का निर्माण, स्लग मैनेजमेंट प्लांट जैसे कायों के मद्देनजर राज्य की ओर से भेजे गए प्रस्ताव का राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) परीक्षण करा रहा है। अपर सचिव एवं प्रदेश में नमामि गंगे परियोजना के कार्यक्रम निदेशक उदयराज सिंह ने इसकी पुष्टि की।

नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत पूर्व में गंगा के उद्गम स्थल गोमुख से लेकर हरिद्वार तक गंगा से लगे 15 नगरों में एसटीपी व नाला टैपिंग के कार्य किए गए थे। इसके पीछे मंतव्य यही है कि इन नगरों से गंदगी और कूड़ा-कचरा गंगा में न समाने पाए। इस पहल के सार्थक परिणाम भी आए हैं। हरिद्वार तक गंगा जल की गुणवत्ता में सुधार इसका उदाहरण है। इसके साथ ही सरकार ने गंगा की सहायक नदियों में भी नमामि गंगे के अंतर्गत इसी तरह की पहल कराने में सफलता पाई है। ऊधमसिंह नगर जिले में नौ प्रोजेक्ट पूर्व में स्वीकृत किए जा चुके हैं।

इस बीच पिछले साल दिसंबर मध्य में शासन की ओर से नमामि गंगे में गौरीकुंड से लेकर हरिद्वार तक विभिन्न कार्यों के लिए 409.76 करोड़ रुपये का प्रस्ताव एनएमसीजी को भेजा। इसमें गौरीकुंड, तिलवाड़ा, चोरपानी ढालवाला, नीलकंठ महादेव, स्वर्गाश्रम, सपेरा बस्ती में एसटीपी व सीवर लाइन निर्माण, लक्कड़घाट, हरिद्वार, श्रीनगर व देवप्रयाग में सेप्टेज उपचार और जगजीतपुर, सराय, लक्कड़घाट व श्रीनगर में स्लग मैनेजमेंट प्लांट से संबंधित कार्य शामिल हैं।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस प्रस्ताव की स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार से आग्रह किया। बाद में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने के कारण यह पहल आगे नहीं बढ़ पाई। अब इसे लेकर तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं। कार्यक्रम निदेशक नमामि गंगे परियोजना उदयराज सिंह ने उम्मीद जताई कि इस माह या फिर अगले माह यह प्रस्ताव स्वीकृत हो जाएगा।

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