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मुस्लिमों ने दिया हिंदू पड़ोसी के शव को कंधा, पेश की एकता की मिसाल

जिले के कालियाचक-2 ब्लॉक के लोहाईतला गांव के लोगों ने देश भर में हिंदू और मुस्लिम तबके के बीच बढ़ती दूरी के इस दौर में सांप्रदायिक सद्भाव की एक नई मिसाल कायम की है।

गांव के एक बुजुर्ग बिनय साहा की मौत के बाद उनके दोनों पुत्रों कमल साहा और श्यामल साहा को सूझ नहीं रहा था कि वह लोग इस लॉकडाउन में अंतिम संस्कार की व्यवस्था कैसे करें।

कहतें है न विपत्ति के समय परिवार के बाद अगर कोई इनसान के साथ खड़े होते हैं तो वह उसके पड़ोसी होते हैं। यहां भी उनके पड़ोसी इस विपत्ति की घड़ी में मदद के लिए सामने आए। उन्होंने न सिर्फ अर्थी को कंधा दिया बल्कि शव यात्रा के दौरान राम नाम सत्य है का उच्चारण भी किया।

गांव में साहा परिवार ही अकेला हिंदू परिवार है। बाकी सौ से ज्यादा मुस्लिम परिवार हैं। मृत बिनय साहा के पुत्र श्यामल बताते हैं कि मुस्लिम पड़ोसियों से घिरे होने के बावजूद अब तक हमने कभी खुद को अकेला महसूस नहीं किया है।

लेकिन पिताजी की मौत ने हमें चिंता में डाल दिया था। लॉकडाउन की वजह से हमारे दूसरे रिश्तेदार नहीं पहुंच सके। हमारे लिए अकेले पिता के शव के 15 किमी दूर शवदाह गृह तक ले जाना संभव नहीं था। मुस्लिम पड़ोसियों से मदद मांगने में भी हमें हिचिकचाहट हो रही थी।

लेकिन तृणमूल कांग्रेस की अगुवाई वाले स्थानीय ग्राम पंचायत की प्रमुख अस्करा बीबी और उके पति मुकुल शेख ने साहा को हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। अस्करा बीबी ने कहा कि बिनय साहा के अंतिम संस्कार ने इलाके के तमाम लोगों ने राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठ कर मदद की।

साहा के पड़ोसी और इलाके के माकपा नेता सद्दाम शेख कहते हैं कि मानवीय रिश्तों में धर्म कभी आड़े नहीं आता। हमने वही किया जो करना चाहिए था। धर्म अहम नहीं है। संकट के समय अपने पड़ोसी की मदद करना हमारा फर्ज था।

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