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ऋषिगंगा और तपोवन हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में कार्यरत लापता श्रमिकों को लेकर विभिन्न राज्यों से लोग निरंतर संपर्क

सीमांत चमोली जिले में आपदा की जद में आए ऋषिगंगा और तपोवन हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में कार्यरत लापता श्रमिकों व कार्मिकों को लेकर विभिन्न राज्यों से लोग निरंतर यहां संपर्क कर रहे हैं। राज्य स्तरीय इमरजेंसी आपरेशन सेंटर देहरादून और जिला आपदा नियंत्रण कक्ष चमोली से मिली जानकारी के अनुसार इन राज्यों में पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड शामिल हैं। इसके साथ ही उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से भी लोग अपने स्वजनों के बारे में जानकारी ले रहे हैं।

इन दोनों हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में उत्तराखंड समेत विभिन्न राज्यों के श्रमिक व कार्मिक कार्यरत हैं, जिनमें कई लापता हैं। ऐेसे में अपने स्वजनों को लेकर संबंधित परिवारों में चिंता बनी हुई है। उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों के लापता व्यक्तियों के खोज-बचाव के साथ ही उनके परिवारों से समन्वय के लिए देहरादून स्थित राहत आयुक्त कार्यालय में राज्य स्तरीय इमरजेंसी आपरेशन सेंटर स्थापित किया गया है। इस सेंटर से मिली जानकारी के अनुसार रोजाना ही दो से ढाई सौ फोन काल आ रही हैं। बिहार, उत्तर प्रदेश व हिमाचल प्रदेश के कई व्यक्तियों ने उक्त परियोजनाओं में कार्यरत स्वजनों के बारे में जानकारी ली है।

सीमांत चमोली जिले में आपदा की जद में आए ऋषिगंगा और तपोवन हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में कार्यरत लापता श्रमिकों व कार्मिकों को लेकर विभिन्न राज्यों से लोग निरंतर यहां संपर्क कर रहे हैं। राज्य स्तरीय इमरजेंसी आपरेशन सेंटर देहरादून और जिला आपदा नियंत्रण कक्ष चमोली से मिली जानकारी के अनुसार इन राज्यों में पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड शामिल हैं। इसके साथ ही उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से भी लोग अपने स्वजनों के बारे में जानकारी ले रहे हैं।

इन दोनों हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में उत्तराखंड समेत विभिन्न राज्यों के श्रमिक व कार्मिक कार्यरत हैं, जिनमें कई लापता हैं। ऐेसे में अपने स्वजनों को लेकर संबंधित परिवारों में चिंता बनी हुई है। उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों के लापता व्यक्तियों के खोज-बचाव के साथ ही उनके परिवारों से समन्वय के लिए देहरादून स्थित राहत आयुक्त कार्यालय में राज्य स्तरीय इमरजेंसी आपरेशन सेंटर स्थापित किया गया है। इस सेंटर से मिली जानकारी के अनुसार रोजाना ही दो से ढाई सौ फोन काल आ रही हैं। बिहार, उत्तर प्रदेश व हिमाचल प्रदेश के कई व्यक्तियों ने उक्त परियोजनाओं में कार्यरत स्वजनों के बारे में जानकारी ली है।

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