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आज हुआ साल का आखिरी सूर्यग्रहण

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सूर्यग्रहण के दौरान आज सूर्य आग के छल्ले जैसा नजर आएगा। इसका कारण यह है कि इन दिनों  सूर्य पृथ्वी के अपेक्षाकृत निकट है, जबकि चंद्रमा दूर है। अत: चंद्रमा सूर्य को पूरा नहीं ढक पाएगा और इसकी परिधि नजर आती रहेगी। हालांकि, यह नजारा दक्षिण भारत के कुछ शहरों से ही नजर आएगा। शेष स्थानों से आंशिक सूर्यग्रहण दिखेगा।भारत में इससे पहले एन्यूलर सूर्यग्रहण 15 जनवरी 2010 को देखा गया था, जबकि अगला सूर्यग्रहण 21 जून 2020 को दिखाई देगा। यहां यह महत्वपूर्ण है कि अगले 100 वर्षों में भारत में केवल छह सूर्यग्रहण ही देखे जा सकेंगे, जो वर्ष 2020, 2031, 2034, 2064, 2085 और 2114 में दिखाई देंगे। 

रिंग ऑफ फायर

एरीज के वैज्ञानिक शशिभूषण पांडे ने बताया कि एन्यूलर सूर्यग्रहण की विशेषता यह होती है कि इसमें चंद्रमा सूर्य की परिधि के अलावा शेष भाग को ढक लेता है, जिससे केवल इसकी परिधि दिखाई देती है, जो एक आग के छल्ले की तरह नजर आती है, इसीलिए इस ग्रहण को रिंग ऑफ फायर नाम दिया गया है। नैनीताल सहित उत्तर भारत के अधिकतर क्षेत्रों में हालांकि आंशिक सूर्यग्रहण ही दिखाई देगा, लेकिन दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों से एन्यूलर सूर्यग्रहण दिखाई देगा, जिनमें कोयंबटूर कोझिकोड, मदुरई आदि शहर शामिल हैं, जहां से सर्वाधिक एन्यूलर ग्रहण दिखाई देगा। पांडे ने बताया कि भारत में इस सूर्यग्रहण का सर्वाधिक कवरेज कोयंबटूर से होगा। 
इसके अलावा, एन्यूलर ग्रहण सऊदी अरब, कतर, यूएई, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका, मलयेशिया, इंडोनेशिया, सिंगापुर और मरियाना आईलैंड इत्यादि से भी दिखाई देगा।

विशेष कार्यक्रम एरीज में विद्यार्थियों के लिए होंगे

26 दिसंबर को लगने वाले एन्यूलर सूर्यग्रहण को लेकर आर्यभट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान (एरीज) नैनीताल में विशेष तैयारियां की गईं हैं। डीएम सविन बंसल की पहल पर यहां विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों एवं आम नागरिकों के लिए सूर्यग्रहण दर्शन के अलावा वैज्ञानिकों से वार्ता, क्विज, निबंध, टॉक प्रतियोगिता होगी। इसमें विशेषकर विद्यार्थियों को सूर्यग्रहण से संबंधित वैज्ञानिक जानकारियां दी जाएंगी। एरीज के वैज्ञानिक शशिभूषण पांडे ने बताया कि डीएम सविन बंसल मुख्य अतिथि होंगे। उन्होंने बताया कि एरीज के निदेशक डॉ. दीपांकर बनर्जी सूर्यग्रहण के अध्ययन के लिए कोयंबटूर रवाना हो चुके हैं, जहां वे इस एन्यूलर सूर्यग्रहण का वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे।

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