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चमोली जिले में ग्लेशियर दरकने से उत्तराखंड के सिंचाई महकमे ने भी लिया सबक

चमोली जिले में रैणी गांव के नजदीक ग्लेशियर दरकने से आई आपदा से उत्तराखंड के सिंचाई महकमे ने भी सबक लिया है। ग्लेशियरों के अध्ययन के मद्देनजर विभाग द्वारा सिंचाई अनुसंधान संस्थान रुड़की में विशेष अनुभाग बनाया जा रहा है। राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (एनआइएच) रुड़की और भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (आइआइआरएस) हैदराबाद के सहयोग से यह अध्ययन किया जाएगा। अनुभाग में विभाग के 10 विशेषज्ञ कार्मिकों की तैनाती की जा रही है।

उत्तराखंड में राज्य स्तर पर नदियों पर नजर रखने के साथ ही बाढ़ नियंत्रण का जिम्मा मुख्य रूप से सिंचाई विभाग के पास है। यही नहीं, एक दौर में विभाग ने राज्य में अनेक जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाई। तमाम बांधों के बैराज निर्माण में उसकी भूमिका रही है। अब बदली परिस्थितियों में ग्लेशियरों से निकलने वाली नदियों में होने वाली हलचल, उनके वेग आदि की पुख्ता जानकारी उसके पास होनी चाहिए। हालांकि, मुख्य नदियों की निरंतर मानीटरिंग करता है, मगर ग्लेशियरों में होने वाली हलचल से वह अनजान रहता है। इस सबको देखते हुए हाल में सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने ग्लेशियरों के अध्ययन के मद्देनजर विभाग में अलग से अनुभाग बनाने के निर्देश दिए थे। इस क्रम में अब चमोली आपदा के बाद तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

विभाग के प्रमुख अभियंता मुकेश मोहन के मुताबिक रुड़की में विभाग का अनुसंधान संस्थान है। इसी के अंतर्गत ग्लेशियरों के अध्ययन को अनुभाग बनाया जा रहा है। इसमें तैनात किए जा रहे साइंटिस्ट स्टाफ को एनआइएच में प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। साथ ही आइआइआरएस हैदराबाद से भी टाइअप कर ग्लेशियरों से संबंधित सैटेलाइट इमेजरी प्राप्त की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रयास ये है कि जल्द से जल्द सभी प्रक्रियाएं पूरी कर विभाग भी ग्लेशियरों का अध्ययन शुरू कर दे। इससे बाढ़ नियंत्रण समेत अन्य कार्यों में मदद मिलेगी।

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