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एक बार फिर भारत पाक के बीच एक स्थायी सिंधु आयोग (पीआईसी) का गठन किया

पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण में ले जाना चाहता था . पाकिस्तान ने मामले को अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण में ले जाने का सुझाव दिया, जिसको भारत ने अस्वीकार कर दिया। 1951 में प्रधानमंत्री नेहरू ने टेनसी वैली अथॉरिटी के पूर्व प्रमुख डेविड लिलियंथल को भारत बुलाया। लिलियंथल बाद में पाकिस्तान भी गये और वहां से वापस लौटकर अमेरिका चले गये। उन्होंने जल विवाद पर एक लेख लिखा और विश्व बैंक से इस मामले में दखल देने के लिए अनुरोध किया, जिसके बाद विश्व बैंक अध्यक्ष यूजीन रॉबर्ट ब्लेक ने भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करना स्वीकार किया। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बैठकों का सिलसिला शुरू हो गया, यह अब भी जारी है।

दोनों देशों ने एक स्थायी सिंधु आयोग (पीआईसी) का गठन किया है,जो संधि के कार्यान्वयन के लिए नीतियां बनाता है। यह आयोग हर साल बैठकें आयोजित करता है और दोनों देशों के सरकारों को अपने काम की रिपोर्ट देता है।वर्ष 1947 में देश के विभाजन के समय सिंधु और उसकी सहायक नदियों का मुख्य हिस्सा भारत में आ गया था। जिसके बाद एक अप्रैल 1948 को भारतीय पंजाब ने पाकिस्तान को जाने वाली नहरों का पानी रोक दिया, ताकि पूर्वी पंजाब के असिंचित क्षेत्रों के लिए सिंचाई व्यवस्था की जा सके। इससे पाकिस्तानी पंजाब क्षेत्र में पानी की भयानक तंगी के हालात पैदा हो गए थे। इसे देखते हुए 30 अप्रैल 1948 को पाकिस्तानी पंजाब को पानी बहाल कर दिया था। 4 मई 1948 को इस मुद्दे पर बातचीत के लिए एक बैठक बुलाई गई थी। इस सम्मेलन में एक समझौता हुआ था।सिंधु जल समझौते के कारण ही आज तक पाकिस्तान को पानी मिल रहा है, लेकिन अब केंद्र सरकार ने पंजाब में बहने वाली रावी, सतलुज और व्यास नदियों के अतिरिक्त पानी को पाकिस्तान में जाने से रोकने का काम शुरू कर दिया है। इनसेट में सिंधु और सहायक नदियों का नक्शा। फाइल फोटो

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