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भारत-नेपाल सीमांकन क्षतिग्रस्त पिलरों के पुनर्निर्माण को लेकर 26 मई तक चिह्नीकरण का काम

भारत-नेपाल सीमांकन करने वाले सीमा स्तंभों (पिलरों) की दशा, दिशा एवं क्षतिग्रस्त पिलरों के पुनर्निर्माण को लेकर दोनों देशों के अधिकारियों की बैठक बनबसा स्थित एनएचपीसी सभागार में हुई। तय किया गया कि 26 मई तक सर्वे कर गायब, टूटे और क्षतिग्रस्त पिलरों को चिह्नित किया जाएगा।शुक्रवार को एनएचपीसी सभागार में डीएम एसएन पांडेय एवं नेपाल कंचनपुर के डीएम (सीडीओ) सुशील वैद्य की मौजूदगी में हुई बैठक में सीमांकन पिलरों के संबंध में महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। पिलर संख्या 711 से 800 तक के टूटे, क्षतिग्रस्त और गायब पिलरों का 26 मई तक चिह्नीकरण करने का निर्णय लिया गया।

कंचनपुर के डीएम सुशील वैद्य एवं कैलाली के डीएम योगराज बोहरा ने कहा कि दोनों देशों की सर्वे टीमों ने कार्य आगे बढ़ाने और तय मेंडेड के अनुसार पिलर संख्या 700 से कार्य शुरू करने का निर्णय लिया है। सर्वे टीमों को पिलर संख्या 700 से कार्य करने का मेंडेड पूर्व से निर्धारित है। सर्वे के दौरान आने वाली समस्याओं के निस्तारण को दोनों देशों के प्रशासनिक अफसर हल निकालेंगे। 

बैठक में चंपावत के डीएम, कंचनपुर (नेपाल) के डीएम, यूपी सिंचाई विभाग शारदा हेडवर्क्स के अधिकारियों,  दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों, बार्डर प्रहरियों, लखीमपुर खीरी, ऊधमसिंह नगर के अधिकारियों, वन विभाग, पुलिस, सर्वे ऑफ नेपाल और सर्वे आफ इंडिया के अधिकारियों ने अपने सुझाव दिए। तय किया गया कि सर्वे के दौरान सभी अधिकारी आपसी तालमेल बनाने के साथ संपर्क में रहेंगे।

26 मई तक होने वाले सर्वे के बाद पुन: बैठक कर आगे की कार्यवाही का फैसला लिया जाएगा। सर्वे में कोई दिक्कत न आए, इसके लिए सर्वे टीम के वाहनों और सर्वे टीम की आईडी दोनों देशों के अधिकारियों के साथ साझा की जाएगी। डीएम योगराज बोहरा ने कहा कि सीमा पर हुए अतिक्रमण के संबंध में जानकारी जुटाकर उचित कार्रवाई की जाएगी। चार माह बाद क्लोजिंग मीटिंग में सर्वे एवं अन्य बिंदुओं पर भी चर्चा होगी।

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