भारतीय वायु सेना दिवस आज, थल सेना और वायु सेना में उत्तराखंड के वीरों ने दिखाया पराक्रम। ..

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जहाँ युद्ध में साहस और पराक्रम की बात हो और उत्तराखंड का नाम न आए तो ऐसा मुमकिन नहीं है। थल सेना में उत्तराखंड के वीरों के साहस की असंख्य गाथाएं है थल सेना के साथ ही वायु सेना के वीरों ने भी अपने पराक्रम के दम में अति विशिष्ट सेवा मेडल से लेकर वायु सेना मेडल तक अपने नाम किए हैं। आज वायु सेना दिवस है। आज ही के दिन वर्ष 1932 में भारतीय वायुसेना की स्थापना हुई थी। देश आजाद होने से पहले वायुसेना को रॉयल इंडियन फोर्स के रूप में पहचाना जाता था। वायु सेना इस साल अपना 88वां स्थापना दिवस मना रही है।
थल सेना की तुलना में वायु सेना में उत्तराखंडियों की वीरता व शौर्य की गाथाएं अनेक हैं। बात जब भी देश की सीमाओं की सुरक्षा की आई तो वायुसेना में तैनात अधिकारी व जवान (एयरमैन) अपना शौर्य दिखाने में कभी पीछे नहीं रहे।

30 से अधिक अधिकारियों-जवानों को वीरता पदक प्राप्त
आसमान के इन जांबाजों की वीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वायु सेना में तैनात रहे 30 से अधिक अधिकारियों-जवानों को अब तक वीरता पदक प्राप्त हो चुके हैं। किसी को वीर चक्र मिला तो किसी को वायुसेना मेडल।

सराहनीय सैन्य सेवा के लिए विशिष्ठ सेवा मेडल व परम विशिष्ट सेवा मेडल प्राप्त करने वाले अफसरों की तादाद भी कम नहीं है। वर्ष 1965 में भारत-चीन व वर्ष 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध में भी वायुसेना में तैनात रहे जवानों ने अपनी वीरता व शौर्य का परिचय दिखाते हुए दुश्मनों को चारों खाने चित्त किया था। आकाश से सरहदों की रक्षा में उत्तराखंड के वीर आगे रहे हैं, लेकिन महिलाओं को वायुसेना में स्थायी कमीशन दिलाने में भी राज्य के नेतृत्व को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। भारतीय वायुसेना में अधिकारी रही अनुपमा उत्तराखंड की ही हैं, जिन्होंने महिलाओं को वायु सेना में स्थायी कमीशन के मुहिम को मुकाम तक पहुंचाया ।

उत्तराखंड के बीर जाबांजों को मिले अवार्ड 

अतिविशिष्ट सेवा मेडल (एवीएसएम) 03
परम विशिष्ट सेवा मेडल (पीवीएसएम) 02
कीर्ति चक्र (केसी) 01
एम इन डी 03
शौर्य चक्र (एससी) 01
सेना मेडल (एसएम) 03
वीर चक्र (वीआरसी) 08
वायु सेना मेडल(वीएसएम) 07