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उत्तराखंड में गुलदार और बाघों की संख्या में हुई बढ़ोतरी, शिकार बन रहे मासूम ..

उत्तराखंड में गुलदारों का कहर दिन – प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. लोग गुलदार के हमलों के शिकार बन रहे हैं. ग्रामीण से लेकर शहरी इलको तक आए इनके हमले की खबर बढ़ती जा रही है चंद दिनों पहले एक गुलदार ने एक बच्ची और उसके भाई पर भी हमला बोला था .गुलदार का अतिक्रमण गांवों में पालतू जानवारो की तरह हो गया है. सिमटते जंगली जमीन के बीच गुलदार की पहुंच गांव तक हो गई है. गुलदार के हमलों का शिकार सबसे ज्यादा मासूम बच्चे बन रहे हैं. इन सबसे इतर वन विभाग के लिए राहत भरी खबर यह है कि गुलदारों की संख्या में इजाफा भी हुआ है. उत्तराखंड वन विभाग जंगली जानवरों की गणना के लिए एक रणनीति भी तैयार कर रहा है.

वन विभाग के पीसीसीएफ जयराज सिंह के मुताबिक वन क्षेत्र में गुलदार की वास्तविक संख्या और घनत्व वाले क्षेत्रों का पता न चलने की वजह से गुलदारों को वन क्षेत्र तक सीमित करने की दिशा में सार्थक पहल नहीं हो पा रही है. गुलदार इंसानी आबादी वाले क्षेत्रों में दस्तक दे रहे हैं. पहले अविभाजित उत्तर प्रदेश के दौर में हर साल राज्य स्तर पर वन्यजीव गणना होती थी. उत्तराखंड बनने के बाद साल 2003, 2005 और 2008 में ही वन्य जीव गणना हुई है. हालांकि बाघ और हाथियों की गणना राष्ट्रीय स्तर पर 2015 तक होती आई है.

अब हर होगी  जानवरों की गिनती

उत्तराखंड के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक राजीव भरतरी का कहना है कि राज्य स्तर पर वन्यजीव गणना में निरंतरता बनाए रखने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं. वहीं अब प्रदेशभर में वन्यजीवों की गणना की जाएगी. इसमें गुलदार समेत दूसरे वन्यजीवों की सही संख्या सामने आएगी

राज्य में गुलदार की गणना

उत्तराखंड में साल 2003 में गुलदारों की संख्या 2,092 रही. 2005 में ये आंकड़े बढ़कर 2,105 हो गए. 2008 की जनगणना में गुलदारों की संख्या में ज्यादा इजाफा हुआ और आकंड़े बढ़कर 2,335 हो गए. 2019 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक गुलदारों की संख्या 2,500 से ज्यादा गुलदार वन क्षेत्र में हैं.

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