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प्रदेश के छह पर्वतीय जिलों के 64 गांवों के निवासियों को अब बरसात में नदी-नाले पार करने में दिक्कत नहीं होगी

प्रदेश के छह पर्वतीय जिलों के 64 गांवों के निवासियों को अब बरसात में नदी-नाले पार करने में दिक्कत नहीं होगी। इन गांवों को जोडऩे वाले रास्तों पर स्थित नदी-नालों में हेस्को संस्था और आइसीआइसीआइ फाउंडेशन के सहयोग से 15 गार्डर पुलों का निर्माण किया गया है।शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने आवास में आयोजित कार्यक्रम में इन ग्राम सेतुओं का वर्चुअली उद्घाटन किया।इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ में मानसून में नदी-नालों के उफान पर रहने से जनजीवन प्रभावित होता है। ऐसे में वहां जनजीवन सामान्य करने की दिशा में ये पुल महत्वपूर्ण साबित होंगे। उन्होंने कहा कि राज्य के समग्र विकास में सामाजिक संगठन और संस्थाएं इस तरह के व्यापक कार्यक्रमों के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि निकट भविष्य में भी हेस्को संस्था और आइसीआइसीआइ फाउंडेशन राज्य में इस तरह के प्रयोग आगे बढ़ाएंगे। सफल प्रयोगों को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी इन पुलों का संज्ञान लेते हुए ग्राम पंचायत स्तर पर ऐसे कार्यों को आगे बढ़ाने को आगे आएंगे।उन्होंने कहा कि आने वाले समय में नीति आयोग भी इन प्रयोगों को अपनी योजनाओं में सम्मिलित कर उत्तराखंड को आदर्श राज्य बनाने में सहायक व पथ प्रदर्शक सिद्ध होगा।

कार्यक्रम में उपस्थित रहे नीति आयोग के उपाध्यक्ष डा राजीव कुमार ने कहा कि उत्तराखंड के विकास के लिए आयोग हरसंभव मदद करेगा। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए हेस्को व आइसीआइसीआइ फाउंडेशन के कार्यों की सराहना की। साथ ही कहा कि समाज, सरकार व उद्यम मिलकर कार्य करें तो राज्य तेजी से आगे बढ़ेगा।हेस्को संस्था के संस्थापक एवं पद्मभूषण डा अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि विज्ञान ही विकास की दशा और दिशा तय करता है। ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर हमें विशेष ध्यान देना होगा। विज्ञान व तकनीकी क्षेत्र में सभी संगठनों का सहयोग लेकर राज्य को आगे बढ़ाना होगा।आइसीआइसीआइ फाउंडेशन के अध्यक्ष सौरभ सिंह ने कहा कि फाउंडेशन ने समाज का पैसा सामाजिक सरोकारों एवं जनहित में लगाने का प्रयास किया है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के निवासियों को सुविधा मिल सके। भविष्य में भी इस तरह के कार्य किए जाएंगे।हेस्को के तकनीकी सहयोग से इन पुलों में प्रत्येक की लागत केवल आठ लाख रुपये के लगभग आई है। राज्य की परिस्थितियों के हिसाब से इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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