उत्तराखंड पर्यटन

हिमालय में मिले 5000 पुराने आर्यन के वंशज

 15,000 फीट ऊंचाई पर बसे दाह और बीमा हिमालय में दो गांव है जहां आर्यन के वंशज रहते हैं। इसे ‘आर्यन वैली’भी कहते हैं। आर्यन्स की असल नस्ल को बचाए रखने के लिए पहले यहां जाना मना था, लेकिन अब यहां टूरिस्ट्स जा सकते हैं।

हिमालय के कुछ गांवों में 5000 साल पुराने आर्यन के आखिरी वंशज आज भी रहते हैं। ये मूल आर्यन के वंशज हैं। आज भी अपनी असली नस्ल को बनाए रखने के लिए 80%लोग अपने ही गांव के लोगों से शादी करते हैं, बस 20%ही बाहर के लोगों से शादी करते हैं।

ब्रोकपास जाति के लोग सालों पहले आए यूरोपियन आक्रमणकारियों के वंशज हैं और बहुत कुछ उनके जैसे दिखते भी हैं। ये लोग कश्मीर और लद्दाख के लोगों से अलग दिखते हैं। यहां की महिलाएं सबसे खूबसूरत मानी जाती हैं। ज्यादातर लोगों की आंखें नीली,रंग गोरा,खूबसूरत नाक और चमकदार स्किन होती है। ब्रोकपास जाति के लगभग 2000 वंशज आज भी हैं जो दाह, हानू, गारकों और दारचिक एरिया में रहते हैं।

पुरुष और महिलाएं दोनों ही कलरफुल कपड़े पहनते हैं। महिलाएं यहां पाए जाने वाले फूल मोन्थू थो या शोक्लो से अपने बाल सजाती हैं। पुरुष अपने कान में मोती पहनते हैं। शादीशुदा महिलाएं गूंथकर चोटी करती हैं जिसकी वजह से वो कुछ-कुछ ग्रीक महिलाओं जैसी दिखती हैं।

भेड़ की स्किन से बने कपड़े, बालों में ऑरेंज फूल और सिल्वर गहने एक ट्रेडिशनल ब्रोकपास ड्रेस है।अच्छे नाक नक्शे, हेल्दी स्किन और फूलों से सजी ये महिलाएं बहुत खूबसूरत दिखती हैं। पुरुषों की नीली आंखे और अच्छा बिल्ड उन्हें बाकी लोगों से अलग बनाता है। यहां आर्यन्स की भाषा ब्रेक्सकाड बोली जाती है और ये बौद्धिज्म को फॉलो करते हैं।


यहां लोग शाकाहारी होते हैं, यहां तक की गाय का दूध और दूध से बनी चीजें भी नहीं खाते। यहां बकरी का दूध चलता है। खाने में जौ की रोटी, हरी पत्ते वाली सब्जियां लेते हैं। यहां बादाम, एप्रिकोट और अखरोट बहुतायत मे मिलते हैं और खूब खाए भी जाते हैं। यहां लोग ब्लैक चाय में जौ का आटा डालकर बहुत पीते हैं।

ये लोग गाते नाचते और खुश रहते हैं। तीन साल में एक बार यहां बोनोनाह फेस्टिवल मनाया जाता है, जो अच्छी फसल होने की खुशी में मनाते हैं। इसमें लड़के-लड़कियां अपने साथी को भी चुनते हैं।जब किसी के घर पर नया मेहमान आता है तो बांगरी फेस्टिवल मनाया जाता है।याता फेस्टिवल में जब भी कोई गांव वाला अमीर हो जाता है, वो पूरे गांव के लिए खाने का इंतजाम करता है।

ब्रोकपास अपने एप्रिकोट, अंगूर और अखरोट के प्रोडक्ट्स के लिए फेमस हैं। यहां नेचर में जो भी मिलता है, उसका ये लोग अच्छी तरह यूज करते हैं। टमाटर और एप्रिकोट का तेल आर्मी और दूसरे लोगों को सप्लाई करते हैं। अंगूर की वाइन भी बनती है। यहां पर 70 से ज्यादा उम्र के काफी आर्यन हैं। 90 की उम्र में भी ये काफी एक्टिव होते हैं।

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