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उच्च न्यायालय ने दी महिलाओं को 23 हफ्ते का गर्भ गिराने की मिली मंजूरी

भ्रूण में कई असमान्यताएं होने की वजह से उच्च न्यायालय ने एक महिला को 23 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति दे दी। न्यायालय ने एम्स द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर विचार करते हुए यह आदेश दिया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भ्रूण में कई असमान्यताएं होने की वजह से जन्म के बाद बच्चे को कई सर्जरी की आवश्यकता होगी। जस्टिस हीमा कोहली और एस. प्रसाद की पीठ ने कहा कि इस बात की पर्याप्त आशंका थी कि जन्म के बाद बच्चे में कई जटिलताएं होतीं, जो उसके सामान्य जीवन के लिए काफी हानिकारक होता।

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि भ्रूण की चिकित्सा स्थिति को देखते हुए हमारा मानना है कि गर्भपात संबंधी कानून के प्रावधानों में ढील दी जाए। इससे पहले एम्स ने रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि गर्भावस्था में मां के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को कोई खतरा नहीं होगा, लेकिन जन्म के बाद बच्चे को कई बड़ी सर्जरी से गुजरना होगा।

महिला ने उच्च न्यायालय से 23 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति मांगी थी। महिला ने कहा था कि इलाज करने वाले डॉक्टरों ने बताया है कि भ्रूण में कई असमान्यताएं है और जन्म के तुरंत बाद बच्चे की कई सर्जरी करने की जरूरत होगी। कई सर्जरी के बाद भी बच्चा सामान्य जीवन जी पाएगा, इसकी कोई निश्चित संभावना नहीं है।

फैसला-
-भ्रूण में कई असमान्यताएं होने की वजह से आदेश दिया 
-इस बच्चे को जन्म के बाद कई सर्जरी की आवश्यकता थी

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