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उत्तराखंड में हेली सेवाओं को गति देने के लिए इससे संबधित आधारभूत ढांचे को और मजबूत बनाया जा रहा

उत्तराखंड में हेली सेवाओं को गति देने के लिए इससे संबधित आधारभूत ढांचे को और मजबूत बनाया जा रहा है। इस कड़ी में अब प्रदेश में केदारनाथ और देहरादून के सहस्रधारा में एयर टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के बंकर (फ्यूल स्टेशन) बनाने की तैयारी है। इससे प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर चलने वाली हेली सेवाओं को एटीएफ के लिए नाहक लंबी उड़ान नहीं भरनी पड़ेगी। विशेष रूप से केदारनाथ हेली सेवाओं को इससे काफी लाभ मिलेगा। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण ने इंडियन आयल कारपोरेशन से इसके लिए बात शुरू कर दी है। प्रदेश में हेली सेवाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। साथ ही हेलीकाप्टर का उपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है। चाहे वह वीआइपी मूवमेंट का मामला हो डिजास्टर मैनेजमेंट का, हर स्थिति में हेलीकाप्टर का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रदेश में चार स्थानों पर नियमित हेली सेवाएं शुरू हो चुकी हैं, जिनकी संख्या बढ़ाकर 13 की जानी हैं।

इसके साथ ही हिमालय दर्शन योजना की भी शुरुआत हो रही है। चार्टड सेवाओं में भी हेलीकाप्टर का उपयोग किया जा रहा है। यही कारण है कि अब हेली कंपनियां उत्तराखंड में खासी रुचि दिखा रही हैं। इस कड़ी में हेलीकाप्टर की वर्कशाप यानी एमआरओ (मेंटिनेंस, रिपयेटर एंड ओवरहाल) सेंटर की भी स्थापना की जा रही है। अब इस कड़ी में हेलीकाप्टर को एटीएफ की सुविधा देने की तैयारी है। हेली सेवाओं के संचालन में आने वाले खर्च में 40 फीसद खर्च एटीएफ का होता है। अभी प्रदेश में एटीएफ की ठोस व्यवस्था नहीं है। अभी केवल जौलीग्रांट एयरपोर्ट से ही एटीएफ लिया जाता है। इसे बैरल में भरकर हेली कंपनियां हेलीपैड पर रखती हैं। हालांकि, इसकी बहुत अधिक स्टोरेज नहीं की जा सकती।ऐसे में हेलीकाप्टरों को फ्यूल भरवाने के लिए लंबी उड़ान भरनी पड़ती है। इसे देखते हुए अब प्रदेश में एटीएफ के दो बंकर बनाने की तैयारी चल रही है।सचिव नागरिक उड्डयन दिलीप जावलकर ने बताया कि इसके लिए इंडियन आयल कंपनी से बात की गई है। एटीएफ के बंकर बनने से हेली कंपनियों को खासी सुविधा मिलेगी।

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