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धामी को पीसीसी में प्रदेश सचिव बनाने का किया गया था एलान, छोड़ दिया था पद

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प्रदेश कांग्रेस में धारचूला विधायक हरीश धामी को प्रदेश सचिव बनाने को लेकर उपजे विवाद की जांच में प्रदेश कांग्रेस के नेता बरी हो गए हैं। गलती एक बाबू की सामने आई है। अब कांग्रेस प्रदेश प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह का कहना है कि पार्टी फोरम से इतर नेताओं ने बयान दिए तो अनुशासनहीनता मानकर सख्त कार्यवाही की जाएगी। कांग्रेस की नई प्रदेश कमेटी में प्रदेश सचिव पद मिलने से आहत धारचूला विधायक हरीश धामी ने नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। इसके साथ ही पार्टी हाईकमान से शिकायत की थी। इसके जवाब में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह, नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश और प्रदेश प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह ने बुधवार को दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव संगठन के वेणु गोपाल से मुलाकात की।

इसके बाद प्रदेश प्रभारी ने बाकायदा पत्र जारी कर बताया कि हरीश धामी को पीसीसी की सूची में विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर शामिल किया गया था। बाबू की गलती के कारण उनका नाम प्रदेश सचिव की सूची में शामिल हो गया। उन्हें अब विशेष आमंत्रित सदस्य बना दिया गया है। प्रभारी ने इसके साथ ही कांग्रेसी नेताओं को पार्टी फोरम पर ही अपनी बात रखने की हिदायत दी है।  धामी मामले का निपटारा होने का अनुमान भले ही लगाया जा रहा हो, लेकिन विधायकों की नाराजगी बरकरार है। एक विधायक के मुताबिक राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से समय लिया गया है। इनके सामने उत्तराखंड कांग्रेस की पूरी तस्वीर रखी जाएगी। पंचायत चुनाव में कांग्रेस ने कई सीटें खाली छोड़ी। इसके अलावा संगठन और कांग्रेस विधायक दल के बीच के संबंध की बात भी की जाएगी।

धामी को गलती से प्रदेश सचिव की सूची में शामिल होने का सवाल है, मैं कुछ नहीं कहूंगा और भी कई मामले हैं। कांग्रेस के सभी विधायकों की एक बैठक पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के साथ संयुक्त रूप से की जाएगी। विधायक इन नेताओं के सामने अपनी बात रखेंगे। मामला सुलझता है तो ठीक, वरना आगे कुछ और सोचा जाएगा।
– करन माहरा, उपनेता कांग्रेस विधायक दल

मैं किसी पद का मोहताज नहीं है। क्या सिर्फ बाबू की गलती से दो बार के विधायक को इस तरह से उत्पीड़ित किया जाएगा। मैं बस इतना ही चाहता हूं कि कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने जो नाम भेजे थे, वे क्या बाबू की गलती से कट गए या प्रदेश प्रभारी ने अपनी तरफ से कोई कदम उठाया। मेरी कोशिश कांग्रेस को जिंदा रखने की है।

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